हरियाणा में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद,आज से दो दिनों की हड़ताल पर डॉक्टर्स - rashtrmat.com

हरियाणा में इमरजेंसी सेवाएं भी बंद,आज से दो दिनों की हड़ताल पर डॉक्टर्स

राष्ट्रमत न्यूज,गुरूग्राम/नई दिल्ली(ब्यूरो)। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज असोसिएशन (एचसीएमएसए) ने 8 और 9 दिसंबर को हड़ताल का आह्वान किया है। इस दो दिवसीय हड़ताल से सरकारी अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप रहने की संभावना है। यह हड़ताल विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती को लेकर की गई है। 3000 से ज़्यादा डॉक्टरों वाला यह असोसिएशन संशोधित सुनिश्चित करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) ढांचे की अधिसूचना और कार्यान्वयन की मांग कर रहा है। असोसिएशन का दावा है कि इसे सरकार ने 2024 में मंज़ूरी दे दी थी, लेकिन अभी तक औपचारिक रूप से जारी नहीं किया गया है।

मेडिसिन ओपीडी चलाई गई

सोमवार को ही डॉक्टरों की हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों में दिखने लगा। सुबह 9 बजे ओपीडी शुरू होने के बावजूद कई डॉक्टर अपने केबिन में मौजूद नहीं थे, जिससे मरीज लंबी लाइन में खड़े रहे।पंचकूला सिविल अस्पताल में यह हालात दिखाई दिए। हालांकि मुलाना मेडिकल कॉलेज से आए दो डॉक्टरों की मदद से मेडिसिन ओपीडी चलाई गई। सोनीपत अस्पताल और बहादुरगढ़ में भी डॉक्टरों के केबिन खाली होने से मरीजों को परेशानी हुई। बहादुरगढ़ की ममता अपने बेटे का इलाज कराने आई थीं, लेकिन एक्सरे नहीं हो सका।

प्रमुख मांगें अनसुलझी रहीं

असोसिएशन एसएमओ पदों पर सीधी भर्ती का भी विरोध कर रहा है और इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि पदोन्नति ही करियर में उन्नति का मुख्य ज़रिया बनी रहनी चाहिए। एचसीएमएसए ने इससे पहले 27 नवंबर को दो घंटे की पेन-डाउन हड़ताल की थी। हालांकि, प्रमुख मांगें अनसुलझी रहीं।

हड़ताल का असर नहीं दिखा

उधर, यमुनानगर सीएमओ डॉ जितेंद्र ने बताया कि जिले में स्ट्राइक बिल्कुल विफल रही। किसी भी प्रकार की मेडिकल सेवा प्रभावित नहीं हुई है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए मेडिकल कॉलेज मुलाना से एक्स्ट्रा डॉक्टर बुलाए गए हैं। ओपीडी के साथ साथ आपरेशन, इमरजेंसी ओर पोस्टमॉर्टम सभी सुचारू रूप से चल रहे हैं। कुरुक्षेत्र और कैथल में भी हड़ताल का असर नहीं दिखा।

सरकार ने लागू कीं इमरजेंसी

इस बीच, हड़ताल से पहले स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी सिविल अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन व्यवस्थाएं लागू कर दी गई हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपातकालीन सेवाएं चालू रहें और मरीजों को देखभाल में पूरी तरह से बाधा न आए।

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