एक स्कूल ऐसा,जहां शिक्षिका आती नहीं,बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं - rashtrmat.com

एक स्कूल ऐसा,जहां शिक्षिका आती नहीं,बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। आजादी के सत्तर साल बाद भी नाक्सल प्रभावित गांवों में ढंग का स्कूल नहीं है। शिक्षक आते नहीं। एक मुश्त हाजिरी रजिस्टर में अपना हस्ताक्षर कर देते हैं। बच्चों का भी। ऐसे में स्कूल चले हम का नारा भी   मजाक लगता है। प्रशासन ने कभी पलट कर देखा नहीं कि जिले में ऐसे कितने स्कूल है।


स्कूल का रास्ता उबड़ खाबड़
लांजी जनपद के अन्तर्गत आने वाली अति नक्सल प्रभावित धीरी मुरूम है,जो खुर्सी टोला पंचायत के अधीन है। इस गांव की दूरी बोदा दलखा हो कर 30किलो मीटर की होगी। किंतु बोदा दलखा से घिरी तक वन मार्ग और जंगली उबड़ खाबड़ होने की वजह से इस गांव में पहुंचने के लिए लांजी से सीता पाला गाता पार घाघरा से मलैधा होकर 70किलो मीटर की दूरी तय कर जाना पड़ता है।

सालों से भवन अधूरा
आज भी गांव बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। खास कर सड़क बिजली पानी स्वास्थ शिक्षा की बड़ी समस्या हैं।अभी तक उक्त गांव में स्कूल भवन नहीं है। पिछले सात सालों से भवन अधूरा पड़ा हुआ है। गांव के ही शिक्षित युवक कालू सिरसाम के कच्चे मकान में संचालित है।
अतिथि शिक्षक को हटा दिया गया
इस शाला में पिछले 5-6सालों से सालेटेकरी निवासी एक महिला शिक्षक पदस्थ हैं जो धीरी गांव से 20 किलो मीटर दूर बकर कट्टा गांव से आना जाना करती है वह भी महीने में एक या दिन ही आ पाती हैं किंतु हाजरी रजिस्टर में अपनी और बच्चों की हाजरी एडवांस में लगा जाती हैं शेष दिन स्कूल बंद रहता है। शिक्षिका की अनुपस्थित में पूर्व में पदस्थ रहे अतिथि शिक्षक बच्चों को पढ़ाता था किंतु उसकी आईडी न बनने से उसे बाहर कर दिया गया है।जबकि उसकी योग्यता बी ए और डी एड है। कालू सिरसाम जब अतिथि शिक्षक की हैसियत से पदस्थ था तो शिक्षिका की अनुपस्थित में भी वह पूरे समय बच्चों को पढ़ाता था किंतु उस की सेवा समाप्त होने से अब स्कूल बंद रहता है। शिक्षिका महीने में एक या दो बार ही आती हैं। मंगलवार को गांव धीरी जा कर जायजा लिया गया तो शिक्षिका अनुपस्थित मिली। स्कूल बंद मिला। शिक्षिका और बच्चों की हाजिरी रजिस्टर में 4 नवंबर तक हाजिरी लगी थीं।


शिक्षिका नहीं आई
गांव के कुछ लोगों ने बताया की शिक्षिका दिवाली की छुट्टी के बाद एक दिन आई हुईं थी। उसके बाद से नहीं आई हैं। और जब से स्कूल बंद है। पूर्व में भी स्कूल में व्याप्त अव्यवस्थायों के मामला सामने आते रहा है। यही नहीं जनपद के तमाम अधिकारियों के अलावा डी ई ओ और जिला प्रशासन के संज्ञान में भी है फिर भी आजादी 70साल बाद भी धीरी गांव के स्कूल की समस्या का निराकरण नहीं हो पाया है।