तीन साल में सुनीता हार्डकोर नक्सली बन गयी,बदनाम करने लगे थे दलम में - rashtrmat.com

तीन साल में सुनीता हार्डकोर नक्सली बन गयी,बदनाम करने लगे थे दलम में

राष्ट्रमत न्यूजबालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट में तीन दशक बाद पहली बार महिला नक्सली ने सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाली सुनीता के पिता बिसरू आयाम भी नक्सली थे। बीजापुर की रहने वाली सुनीता पर 14 लाख का इनाम है। हथियार चलाने में माहिर है। मध्यप्रदेश,महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में वह मोस्ट वान्टेड है।

 छह माह में हथियार चलाना सीखी
सुनीता ने अपने सरेंडर की वजह बताती है कि उसे दलम में बदनाम किया जाने लगा था। उसके पास से इंसास रायफल तीन मैगजीन समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है।उसने बताया कि वो छह माह में ही हथियार चलाना सीख गयी थी। साल 2022 में दलम संगठन ज्वाइन किया। संगठन में कुल 20 लोग थे। माड़ क्षेत्र की 6 महीने हथियार चलाने का प्रशिक्षण ली। उसके बाद हथियार चलाने में माहिर हो गयी। कम उम्र में काबिलियत को देखते हुए मलाजखंड दर्रेकसा नक्सली संगठन का एरिया कमेटी मेंबर एसीएम बना दिया गया। एमएमसी जोन प्रभारी रामदेर की गार्ड बन गई।


तीन साल में अपनी पहचान बना ली
रामदेर का एक और गार्ड सागर भी है। तीन साल में हार्डकोर नक्सली के रूप में पहचान बना ली थी।सुनीता ने बताया कि रामदेर उसे बदनाम करने लगा। उसने आरोप लगाया कि रामदेर कहने लगा कि उसका अवैध संबंध सागर के साथ है। जबकि ऐसा नहीं था। रामदेर ने भी उसका शोषण किया था। रामदेर की भी शादी हो चुकी है। संगठन के लोग शक की नजर से देखने लगे। यह मुझे अच्छा नहीं लगा।मुझे बदनाम करने लगे थे। इस वजह से मन बना लिया कि अब सरेंडर कर दूंगी।
गड्डा खोद कर हथियार छिपा दी
पूछताछ में सुनीता ने बताया कि 1 अक्टूबर की सुबह दलम से नक्सली वर्दी इंसास रायफल समेत अन्य सामग्री लेकर पैदल निकल गई। पहले हथियार और सामग्री को जंगल में गड्ढा खोदकर छिपाया। लांजी थाना क्षेत्र के चैरिया में हाक फोर्स कैंप पहुंची। आत्मसमर्पण की इच्छा जताई। मुझे देखकर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों को हैरानी हुई। सूचना पुलिस और हाकफोर्स के अधिकारी पहुंचे। सुनीता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। उसकी निशानदेही पर हथियार और अन्य सामग्री जब्त की गई।


मुखबिरी के शक में हत्या
बालाघाट में ही चैरिया के जंगल में देवेंद्र नाम के एक युवक की हत्या मुखबिरी के शक में कर दी गई थी। सुनीता ने पूछताछ में बताया कि उनके ही दलम ने वारदात को अंजाम दिया था। इसके लिए रामदेर, रोहित, विमला, तुलसी, चंदू दादा, प्रेमए अश्वीरे और सागर गए थे। देवेंद्र की मुखबिरी की शिकायत किसने की इसकी जानकारी नहीं है।


 सरेंडर पाॅलिसी का लाभ मिलेगा
आईजी संजय कुमार ने बताया कि मध्यप्रदेश की नक्सली सरेंडर की जो पाॅलिसी है उसके तहत सुनीता को सरेंडर के जो लाभ हैं वो मिलेगा। सुनीता को पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता दी जाएगी और उसे स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वह समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन जी सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे के लिए अभियान चला रही है।