टाइगर स्टेट में कागजी सुरक्षा की वजह से बाघों की हो रही मौत - rashtrmat.com

टाइगर स्टेट में कागजी सुरक्षा की वजह से बाघों की हो रही मौत

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट कहा जाता है,लेकिन जिस तरह बाघों की यहां मौत हो रही है उससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यहां बाघों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। कान्हा टाइगर रिजर्व से खबर आई है कि 2 अक्टूबर को एक ही दिन में 2 मादा शावको और एक नर बाघ की मौत हो गई। जिसे लेकर वन विभाग ने दावा किया है कि ये मौतें बाघों के आपसी संघर्ष के कारण हुई है। लेकिन विपक्ष यह मानने को तैयार नहीं है। उसने सरकार और वन विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।


बाघ की मौत पर सियासत
कान्हा टाइगर रिजर्व में बीते दिनों ही दो अलग-अलग घटनाओं में तीन बाघों की मौत हुई। कान्हा नेशनल पार्क के मुण्डीदादर बीट में दो मादा शावकों का शव मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उनकी मौत नर बाघ के हमले में हुई है। वहीं मुक्की परिक्षेत्र में दो बाघों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें एक नर बाघ की मौत हो गई। घटनाओं के बाद पोस्टमार्टम और शवदाह की कार्यवाही की गई और एनटीसी दिल्ली को रिपोर्ट भेजी गई। लेकिन बाघों की मौत को लेकर अब राजनीति भी गरमा गई है।


बीते साल 40 बाघ मरे
बालाघाट के लांजी क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरिते ने बाघों की सुरक्षा और उनकी निरंतर हो रही मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर जमकर सवाल भी उठाया है। समरिते ने कहा कि प्रदेष में बाघों की मौतें बढ़ रही हैं और जांच में प्रोटोकाल का पालन ही नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि बीते साल प्रदेश में 40 बाघों की मौत हुई, लेकिन हर बार इसे आपसी संघर्श बताकर मामला दबा दिया जाता है। बाघों की मौत के अधिकतर मामलों की जांच वन विभाग ने की है। जिसके पीछे का मुख्य कारण बीमारी या आकस्मिक मौत नहीं, बल्कि आपसी टकराव को ही मुख्य कारण बताया है।


14 हजार हेक्टेयर जंगल कटे
पूर्व विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि बालाघाट वाइल्ड लाइफ कारिडोर से साढ़े 14 हजार हेक्टेयर जंगल काटा जा चुका है। जहां कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व के आसपास बने रिसोर्ट्स में अधिकांश डीएफओए सीसीएफ और अन्य वन अधिकारियों का पैसा लगा हुआ है। समरिते के अनुसार पूरे मप्र में 52 टाईगर रिजर्व हैं। पंरतु सभी टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बाघांे और तेदुंए की टेरीटेरी एरिया लगातार कम हो रहा है। क्यों कि उनके जंगल की अवैध कटाई हो रही है।


बाघ की मौत की जांच हो
समरिते ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री ही बाघ संरक्षण प्राधिकरण के चेयरमेन होते हैं। बाघों की सुरक्षा के लिए बजट और प्लान वही तैयार करते है। अब बाघ संरक्षण प्राधिकरण के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीएम मोदी के रहते हुए बाघ की मौत हो जाये और सरकार बात ना करे और वन विभाग के दोषीयों पर कार्यवाही ना हो, कोई आईएफएस अधिकारी संस्पेंड ना हो, यह तो गंभीर विषय है। उन्होने मांग की है कि बाघ की मौत मामले में निष्पक्ष जांच हो।


इसलिए टाइगर मर रहें
बाघ की मौत सिर्फ एक वन्यजीव का मुद्दा नहीं, बल्कि ये सवाल पूरे देश की विरासत और जैव विविधता की सुरक्षा का है। लेकिन बाघों की लगातार हो रही मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच टाइगर स्टेट में टाइगर सुरक्षित हैं फिलहाल कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारी का कहना है कि सभी घटनाओं की जांच एनटीसी गाइडलाइन के तहत की जा रही है। साथ ही बाघों की मौतें वर्चस्व की लड़ाई की वजह से हो रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *