रायगढ़ में अडानी और जिंदल का चल रहा माफिया राज - rashtrmat.com

रायगढ़ में अडानी और जिंदल का चल रहा माफिया राज

राष्ट्रमत न्यूज,रायगढ़(ब्यूरो)। इन दिनों रायगढ़ में अडानी और जिंदल का माफिया राज चल रहा है। जल,जंगल और जमीन को दोहन करने दोनों रायगढ़ में एढ़ी चोटी एक किये हैं। ग्रामीण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से लेकर हाईकोर्ट की शरण में हैं,इसके बावजूद अडानी कंपनी दमनात्मक रवैया अपनाते हुए येनकेन प्रकारेण खदान शुरू करने पर आमादा है। दूसरी ओर जिंदल पावर प्लांट डाल रहा है। ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं।


जनसुनवाई निरस्त करने आवाज उठी
तमनार विकासखंड के ग्राम पंचायत आमगांव के ग्रामीणों ने जिंदल पावर प्लांट के कोल माइंस के लिए आगामी 14 अक्टूबर को कलेक्टर रायगढ़ में प्रस्तावित जनदर्शन व जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग उठाई है। इसके लिए गाँव के लगभग सैकड़ों महिला.पुरुष जनप्रतिनिधियों सहित ग्रामीण रायगढ़ पहुंचकर प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया।


हर व्यक्ति विरोध करने तैयार रहे
ग्राम आमगांव में इस मुद्दे पर आयोजित बैठक में यह सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रत्येक घर से एक सदस्य रायगढ़ जाकर अपना विरोध जताएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि गाँव की जल,जंगल,जमीन किसी भी कीमत पर कंपनी को नहीं बेची जाएगी। गारे.पेलमा सेक्टर1 हेतु कंपनी व शासन प्रशासन द्वारा मांगी गई भूमि अधिग्रहण की स्वीकृति को वे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
विस्थापन और प्रदूषण का दंश
ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वजों की धरोहर रही यह उपजाऊ भूमि पीढ़ी दर पीढ़ी से उनकी आजीविका का आधार है। यहाँ की जमीन पर वे पाँच पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं। ऐसे में इसे किसी भी सूरत में बेचना स्वीकार नहीं है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि कंपनी क्षेत्र में आई तो वन और पर्यावरण प्रदूषण फैलेगा। जिससे फसलों को नुकसान होगा। पशुओं के लिए चारा-पानी की समस्या बढ़ेगी। वहीं बाहरी लोगों के प्रवेश से ग्रामीण रोजगार से वंचित हो जाएंगे।


गांव का अस्तित्व खतरें में
ग्रामवासियों ने आगे कहा कि हजारों ट्रेलर वाहनों के लगातार आवागमन से दुर्घटनाएँ होंगी और जन-धन की हानि की आशंका बढ़ेगी। विस्थापित होकर दर.दर भटकना पड़ेगा और गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
जबरन भूमि पूजन किया
कोयले का खनन करने वाली अडानी कंपनी की तमनार में मनमानी चरम पर है। तमाम विरोधों के बाद भी कंपनी तानाशाही अंदाज में कार्य कर रही है। ग्रामीण नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से लेकर हाईकोर्ट की शरण में हैं,इसके बावजूद अडानी कंपनी दमनात्मक रवैया अपनाते हुए येनकेन प्रकारेण खदान शुरू करने पर आमादा है। जिसकी झलक 9 अक्टूबर को देखने को मिली। ग्रामीणों के विरोध के बीच सुबह अडानी कंपनी के गुर्गे, अधिकारी,महाजेंको कंपनी के अधिकारियों के साथ मिलकर मुड़ागांव में कोयला खदान का जबरन भूमिपूजन कर डाला।


गुर्गे के दम पर अडानी
सवाल लोकतंत्रीय व्यवस्था पर उठता है कि जब सत्ता दल,विपक्ष जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सभी खदान के विरोध में हैं और ऐसे में अडानी अपने गुर्गों और पैसे के बूते कोयला खदान शुरू करने जा रही है। शुरू से ही अडानी के विरोध में भाजपा और जनप्रतिनिधि थे। फिर जुलाई महीने की शुरुआत में कांग्रेस ने इसका भव्य विरोध किया पूरा प्रदेश संगठन आया। नतीजा सिफर रहा, विरोधों के बाद भी धीरे-धीरे अडानी कंपनी गांवों के जंगल को काटती रही। जंगल साफ करने के ठीक ढाई महीने बाद कंपनी ने खदान का भूमिपूजन कर डाला। विरोध करने वालों में जनचेतना मंच और ग्रामीण ही अभी तक डटे हुए हैं। हाल ही में अडानी कंपनी ने मंच कुछ लोगों पर फर्जी एफआईआर दर्ज करवाई है। ग्रामीणों की आवाज दबाने के लिए अपने गुर्गों को फर्जी ग्रामीण बनाकर संबंधित जगहों पर प्रस्तुत कर खदान की कथित फर्जी अनुमति ले ली है।
छल पूर्वक खदान शुरू
गौरतलब है कि तमनार के 9 ग्राम पंचायतों के 14 गांव में महाराष्ट्र की बिजली कंपनी के लिए कोल ब्लाक आबंटित हुआ था। जिसका एमडीओ अडानी कंपनी के पास है। खनन माफिया अडानी कंपनी ने आदिवासी क्षेत्र में बल प्रयोग किया। ग्रामीणों को धमकाया अपने गुंडों को ग्रामीण बनवाया और अंततः छलपूर्वक खदान शुरू करने की सीमा तक पहुंच गया है। अडानी कंपनी ने माफिया राज की तरह यहां काम कर रही है। विरोध में हैं वे हैं,जिनका घर,खेत,जंगल सब कुछ उजड़ रहा है।


फर्जी ग्राम सभा की रिपोर्ट
अडानी कंपनी ने शुरू से ही दमनात्मक रवैया अपनाया। ग्रामीणों ने बताया कि जंगल काटने के लिए ग्राम सभा हुई ही नहीं है तो कंपनी फर्जी ग्राम सभा का दस्तावेज तैयार किया। ग्रामीण कटाई और मुआवजा के लिए नहीं माने तो अडानी के गुर्गे ग्रामीण बनकर कंपनी का सर्मथन करने संबंधित विभाग पहुंच गए। जिन्होंने विरोध किया उसे अपने हिसाब से सेट कर लिया। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने विरोध का दिखावा किया और अडानी कंपनी ने उन्हें साट कर कईयों को साटने का भी कार्य किया। कंपनी के विरोध में मामले चल रहे हैं पर कंपनी ही लोकतंत्र की हत्या कर मनमानी में व्यस्त है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *