राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली/ पटना(ब्यूरो)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा के साथ ही बीजेपी नेताओं को लगता है कि उत्तर प्रदेश के सात जिलों की सीमाएं बिहार के आठ जिलों से लगती है। दोनों ओर रहन सहन और सियासी असर भी मेल खाता है। सवाल यह है कि क्या बिहार में यूपी का फैक्टर दिखेगा? UP की सीमा से लगी बिहार के आठ जिलों की सीटों पर क्या योगी का असर रहेगा। आठ जिले यानी 38विधान सभा सीट।लेकिन बिहार के लोग मानते हैं कि योगी के राज्य में जैसा माहौल है उस तरह का माहौल बिहार वाले नहीं चाहते।यहां शिक्षा के स्वास्थ्य और विकास के लिए सडकें चाहिए। नीतीश उस जरूरत को पूरा नहीं कर पाएं इसलिए उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे बिहार में बीजेपी की सियासत का कोई असर नहीं पड़ेगा। इस बार पूरे बिहार में एंटीइनकमबेसी का माहौल देखा जा रहा है। चुनाव के दौरान कोई गंभीर मुद्दा ही चुनावी दिशा बदल सकता है।वरना इस बार बिहार में योगी,मोदी और अमितशाह का असर कम पड़ेगा।स्थनीय नेता और स्थानीय मुद्दे की ज्यादा प्रभावी रहेंगे चुनाव में।बसपा का हाथी 2020 के चुनाव से भी कम चलेगा।

प्रभावशाली असर नहीं
बिहार विधानसभा की करीब 38 सीटें हैं जो यूपी की सीमा से लगती हैं। ये सीटें बिहार के 8 जिलों सीवान जिले की जीरादेई, दरौली, रघुनाथपुर और दरौंदा, सारण की एकमा, मांझी और छपरा, भोजपुर की बड़हरा,आरा, बक्सर की ब्रह्मपुर, बक्सर और राजपुर, वाल्मिकी नगर,नौतन गोपालगंज, कैमूर की रामगढ़ और चैनपुर सीटें शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के 7 जिले महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गाजीपुर, चंदौली और सोनभद्र की सीमाएं बिहार के सीवान, छपरा, गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण जैसे जिलों से लगती हैं।यह माना जा रहा है कि प्रभावशाली असर का अभाव रहेगा। सूबे के नेताओं का असर कम पड़ेगा। इसलिए कि यूपी में भी बहुत कुछ ठीक नहीं है। योगी इन्हीं जिलों में प्रचार करने आ सकते हैं। यूपी और बिहार की राजनीति में भारी अंतर है।

उत्तर प्रदेश से सीमा साझा
राज्य में आठ जिलों की 38 विधानसभा सीटें उत्तर प्रदेश से सीमा साझा करती हैं। इन सीटों में पश्चिमी चंपारण की वाल्मिकी नगर और नौतन, गोपालगंज की कुचायकोट भोरे और हथुआ, सीवान जिले की जीरादेई, दरौली, रघुनाथपुर और दरौंदा, सारण की एकमा, मांझी और छपरा, भोजपुर की बड़हरा और आरा, बक्सर की ब्रह्मपुर, बक्सर और राजपुर, कैमूर की रामगढ़ और चैनपुर सीटें शामिल हैं।
पहले जैसी हवा नहीं
साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में यूपी से सटी बिहार की विधानसभा सीटों पर एनडीए और महागठबंधन के बीच करीबी मुकाबला देखने को मिला था। इन सीटों में से आठ पर एनडीए जबकि दस पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी। एक सीट पर मायावती की पार्टी बसपा का प्रत्याशी जीतने में सफल रहा जो बाद में जदयू में शामिल हो गया।

कौनसी पार्टी कितनी सीटें जीती
यूपी से सटी बिहार की इन विधानसभा सीटों में से बीजेपी पांच पर जीतने में सफल रही जबकि तीन पर दूसरे नंबर पर रही। एनडीए में शामिल जदयू को पिछले चुनाव में इस इलाके की तीन सीटों पर जीत दो हासिल हुई और वह चार सीटों पर दूसरे नंबर पर रही।बात अगर महागठबंधन में शामिल दलों की करें तो राजद को तीन सीटों पर जबकि वह एक सीट पर दूसरे स्थान पर रही। कांग्रेस पार्टी दो सीटें जीतने में सफल रही और उसे तीन पर दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। इस क्षेत्र में सीपीआई (एम एल) (एल) भी दो सीटें जीती और वह तीन सीटों पर दूसरे स्थान पर रही।
बसपा का भी दिखा प्रभाव
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बसपा ने बिहार की चैनपुर विधानसभा सीट जीती थी। इस सीट पर बसपा के मोहम्मद जमा खां 23 हजार वोटों से जीते थे। इसके अलावा रामगढ़ विधानसभा सीट पर बसपा के प्रत्याशी अंबिका सिंह दूसरे स्थान पर रहे। यहां राजद के सुधाकर सिंह महज 189 वोटों से जीत पाए। इस सीट पर बसपा को 57,894 वोट मिले जबकि बीजेपी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा।