स्मृतियों में हमेशा रहेंगे विनोद,दीवार में एक खिड़की हमेशा रहेगी - rashtrmat.com

  स्मृतियों में हमेशा रहेंगे विनोद,दीवार में एक खिड़की हमेशा रहेगी

राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। दीवार में एक खिड़की रहती थी के लेखक विनोद कुमार शुक्ल अब हमारे बीच नहीं रहे। स्मृतियों में वे हमेशा रहेंगे। छत्तीसगढ़ के मशहूर कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का 88 साल की उम्र में मंगलवार शाम को निधन हो गया है। छत्तीसगढ़ के लोग उन्हें एक चर्चित कवि के रूप में जानते थे। ज्ञानपीठ का सम्मान उन्हें मिलने के बाद छत्तीसगढ़ के साहित्यकारों का कद बढ़ गया। साहित्यजगत में लोग यह जानने लगे कि छत्तीसगढ़ में लिखने वाले भी हैं।ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले वे छत्तीसगढ़ के पहले साहित्यकार हैं।  वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था।
अच्छे विचार का नष्ट होना

विनोद कुमार शुक्ल ने कहा था- जब हिन्दी भाषा सहित तमाम भाषाओं पर संकट की बात कही जा रही है, मुझे पूरी उम्मीद है कि नई पीढ़ी हर भाषा और हर विचारधारा का सम्मान करेगी। किसी भाषा या अच्छे विचार का नष्ट होना, मनुष्यता का नष्ट होना है।

मैं लिखना जारी रखना चाहता हूं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विनोद कुमार शुक्ल से उनका हाल-चाल जाना था। पीएम छत्तीसगढ़ के 25वें स्थापना दिवस पर रायपुर आए थे। इस दौरान विनोद कुमार शुक्ल ने प्रधानमंत्री से कहा था कि, ‘लिखना मेरे लिए सांस लेने जैसा है। मैं जल्द से जल्द घर लौटना चाहता हूं – मैं लिखना जारी रखना चाहता हूं।’

एक और बेहतर कविता लिख देना

लंबे समय से बच्चों और किशोरों के लिए भी लेखन कर रहे विनोद कुमार शुक्ल ने कहा था कि उन्हें नई पीढ़ी से बहुत उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा, अच्छी किताबें हमेशा साथ रखनी चाहिए। किसी भी क्षेत्र में शास्त्रीयता को पाना है तो उस क्षेत्र के सबसे अच्छे साहित्य के पास जाना चाहिए।आलोचना पर उन्होंने अपने स्वभाव के अनुरूप बेहद सरल लेकिन गहरी बात कही- अगर किसी अच्छे काम की आलोचना की जाती है, तो वही आलोचना आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। कविता की सबसे अच्छी आलोचना है- एक और बेहतर कविता लिख देना।

दीवार में एक खिड़की रहती थी
एम्स प्रबंधन ने 4 बजकर 58 मिनट पर उनके निधन की पुष्टि की। विनोद कुमार शुक्ल हिंदी साहित्य के उन विरल रचनाकारों में थे, जिनकी भाषा अत्यंत सरल होते हुए भी गहरी संवेदना, मानवीय करुणा और दार्शनिक गहराई से भरपूर थी। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी रचनाओं के माध्यम से उन्होंने आम आदमी के जीवन, अकेलेपन और संघर्ष को असाधारण ढंग से शब्द दिए। उनका जाना सिर्फ साहित्य जगत ही नहीं, बल्कि पूरी सांस्कृतिक दुनिया के लिए एक युग का अंत है।