राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। तीस करोड़ के धोखाधड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेताम्बरी भट्ट को अंतरिम जमानत दे दी है।वहीं विक्रम भट्ट को नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फिल्ममेकर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में अंतरिम जमानत दे दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदेश दिया कि आवश्यक बॉन्ड भरने के बाद उन्हें उदयपुर जेल से रिहा किया जाए। अदालत ने इस मामले में शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्दिया और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 19 फरवरी तय की है। हालांकि विक्रम भट्ट फिलहाल उदयपुर जेल में ही रहेंगे।

फर्जी बिल बनाकर रकम निकाली
यह मामला फिल्म प्रोडक्शन के नाम पर लिए गए पैसों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्दिया, जो इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज (जिसमें इंदिरा आईवीएफ और इंदिरा एंटरटेनमेंट एलएलपी शामिल हैं) के संस्थापक हैं, ने आरोप लगाया है कि भट्ट और उनके सहयोगियों ने करीब 30 करोड़ रुपये का गबन किया। आरोप है कि फिल्म प्रोजेक्ट के नाम पर धन लिया गया और फर्जी बिल बनाकर रकम निकाली गई।
सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट को दिसंबर 2025 में मुंबई से गिरफ्तार कर उदयपुर लाया गया था, जहां 7 दिसंबर से वे न्यायिक हिरासत में थे। इस मामले में उदयपुर के दिनेश कटारिया और भट्ट के मैनेजर महबूब अंसारी को भी राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 31 जनवरी को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

धोखाधड़ी का आरोप
इसी बीच जनवरी में एक अन्य कारोबारी ने भी विक्रम भट्ट और उनकी बेटी Krishna Bhatt Sarda पर 13.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मुंबई के वर्सोवा थाने में मामला दर्ज कराया। इस केस की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।
भुगतान न मिलने का दावा
दूसरी ओर, इन आरोपों के बीच विक्रम भट्ट की फिल्म 1920: Horrors of the Heart से जुड़े कई सदस्यों ने भी अपने बकाया भुगतान न मिलने का दावा किया है। ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ से बातचीत में कास्टिंग डायरेक्टर पराग ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी पूरी फीस नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि अपने करियर और भविष्य के काम की चिंता के चलते वह लगभग तीन साल तक इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोले।