रीवा के शिवकुमार निकले मुन्ना भाई,बालाघाट में BMO थे,पुलिस तलाश रही - rashtrmat.com

रीवा के शिवकुमार निकले मुन्ना भाई,बालाघाट में BMO थे,पुलिस तलाश रही

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।रीवा के गुढ़ थाना क्षेत्र के बड़ागांव का रहने वाला शिवकुमार डाॅ सुनील सिंह बनकर बालाघाट में डाॅक्टरी कर रहा था। मरीजों को देख रहा था। पांच साल से डाॅक्टर है। सभी उसे डाॅक्टर सुनील सिंह के नाम से जानते थे।इस मुन्ना भाई की काली पत्री खुली तो पता चला कि यह डाॅक्टर है ही नहीं। फर्जी नाम से डाॅक्टरी कर रहा था। बीएमओ के पद पर पदस्थ है।पुलिस इसकी तलाश कर रही है।

मेडिकल रजिस्ट्रेशन और दस्तावेजों पर संदेह 

मामले की जांच में डॉ. सुनील सिंह के नाम से अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग गृह जिले दर्ज होने की बात सामने आई। कुछ दस्तावेजों में मुरैना, तो कुछ में बालाघाट और रीवा का उल्लेख था।विभाग के पास उसके नाम से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मिले, जबकि परमानेंट रजिस्ट्रेशन का रिकॉर्ड नहीं मिला।राज्यस्तरीय जांच समिति के मुताबिक, उपलब्ध दस्तावेजों में देवास में पदस्थ डॉ. सुनील सिंह के नाम से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया।आरोप है कि इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नियमित किया गया, पदोन्नति दी गई और बिरसा में बीएमओ की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।

दस वर्षो में 65 से 70 लाख रुपए भुगतान 

विभागीय ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2017-18 से मार्च 2026 तक आरोपी को करीब 65 से 70 लाख रुपए का भुगतान किया गया। वर्ष 2009 में नियुक्ति के बाद हुए ऑफलाइन भुगतान का रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग खंगाल रहा है।यह भी बताया गया है कि आरोपी ने रीवा के खुटेही गांव में डॉ. सुनील सिंह के नाम से मकान खरीदा था। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

बिरसा थाना प्रभारी विजय केन के मुताबिक, मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस रीवा समेत संभावित ठिकानों पर उसकी तलाश कर रही है, लेकिन अब तक वह पकड़ में नहीं आया है।मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि वर्ष 2024 में डिग्री की जांच करने वाले तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी या नहीं।

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