राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर(ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा कर दी है। कैबिनेट ने भी इसका अनुमोदन कर दिया है। यह भोपाल की पुलिस प्रणाली से थोड़ा अलग होगा। लेकिन प्रक्रिया वही रहेगी। रायपुर में अपराध का घनत्व तेजी से बढ़ा है। आम लोगों को पुलिस प्रणाली से जल्द लाभ मिलेगा। बढ़ते अपराध को देखते हुए यह रायपुर के लिए बेहद जरूरी हो गया था।23 जनवरी 2026 से लागू हो जाएगा।छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को तेज, सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने साल के आखिरी दिनों में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसकी घोषणा 15 अगस्त 2024 को स्वतंत्रता दिवस के भाषण में की थी, जिसे अब अमलीजामा पहनाया जा रहा है। इस फैसले के साथ छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों की कतार में शामिल हो जाएगा, जहां महानगरों की तर्ज पर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है।

पुलिस व्यवस्था को नई ताकत
पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Raipur Police Reform) की शुरुआत 23 जनवरी, यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन से की जाएगी। यह तारीख सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी अहम मानी जा रही है। आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अनुशासन और सशक्त प्रशासन की जो कल्पना की थी, उसी सोच के अनुरूप राजधानी में पुलिस व्यवस्था को नई ताकत दी जा रही है।
अपराध नियंत्रण में देरी नहीं होगी
अब तक रायपुर सहित पूरे प्रदेश में पुलिस को कई अहम निर्णयों के लिए जिला कलेक्टर और मजिस्ट्रेट पर निर्भर रहना पड़ता था। धरना-प्रदर्शन की अनुमति, धारा 144, लाठीचार्ज, शस्त्र लाइसेंस, बार लाइसेंस जैसे मामलों में पुलिस के पास सीधे अधिकार नहीं थे। पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद ये अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर के पास होंगे, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज होगी और अपराध नियंत्रण में देरी नहीं होगी।

भोपाल सेअलग है पुलिस कमिश्नरी प्रणाली
रायपुर में लागू होने वाली पुलिस कमिश्नरी प्रणाली की तुलना अगर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal Police Commissioner Model) से करें, तो कई समानताएं और कुछ अंतर साफ नजर आते हैं। भोपाल में 9 दिसंबर 2021 को पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू की गई थी, जहां पुलिस आयुक्त को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की शक्तियां दी गईं। भोपाल और इंदौर दोनों में आईजी स्तर के अधिकारी पुलिस आयुक्त बनाए गए, जिनके अधीन डीसीपी और एसीपी कार्य करते हैं।रायपुर में भी इसी मॉडल को अपनाया जा रहा है। यहां कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर की तैनाती होगी। हालांकि रायपुर का भौगोलिक और जनसंख्या विस्तार भोपाल से थोड़ा अलग है, इसलिए प्रशासनिक सीमाओं और थानों के पुनर्गठन में स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखा गया है।
आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी
भोपाल पुलिस कमिश्नर सिस्टम में पुलिस को सीआरपीसी के तहत कई मजिस्ट्रेट पावर दी गई हैं, जिससे अपराधियों पर त्वरित कार्रवाई संभव हो पाई। रायपुर में भी यही लक्ष्य रखा गया है। अब पुलिस बिना मजिस्ट्रेट का इंतजार किए कई मामलों में तत्काल निर्णय ले सकेगी। इससे न केवल कानून-व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी राहत मिलेगी।