बिहार में सत्ता विरोधी हवा की काट ढूंढ रहा NDA,विपक्ष उछल रहा - rashtrmat.com

बिहार में सत्ता विरोधी हवा की काट ढूंढ रहा NDA,विपक्ष उछल रहा

राष्ट्रमत न्यूज,पटना(ब्यूरो)। बिहार विधानसभा चुनाव कीे घोंषणा अक्टूबर में कभी हो चुनाव आयोग कर सकता है। इसलिए किएसआईआर के तहत वोटर लिस्ट जारी कर दिया गया है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी के 22 मंत्री और 80 विधायक सत्ता विरोधी लहर का सामना कैसे करे पाएंगे। वैसे नीतीश के 45 विधायकों में कई 70 के पार के हैं। जाहिर सी बात है कि कई विधायकों की टिकट कटेगी।कुछ नए चेहरों को टिकट दिया जाएगा। बीजेपी सत्ता विरोधी लहर का काट ढूंढ रही है। और उस पर काम कर रही है।बीजेपी इस बार एनडीए में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है और यह उसके मौजूदा विधायकों के लिए चुनौती वाली बात हो सकती है।

बीजेपी की प्लानिंग यह है

नीतीश कुमार की एनडीए सरकार ने चुनाव से पहले कई अहम योजनाएं घोषित की हैं, जिसके चलते बीजेपी सत्ता विरोधी लहर को कम करने और संतुलन स्थापित करने की उम्मीद कर रही है। इसके अलावा बीजेपी की प्लानिंग यह है कि इस बार वह नए चेहरों को मौका देगी लेकिन यह कहना आसान है, और करना काफी मुश्किल होगा।इसको लेकर बिहार बीजेपी के एक नेता ने कहा कि विभिन्न वर्गों के लिए बनाई गईं नई योजनाओं ने निश्चित रूप से NDA की संभावनाओं को मजबूत किया है, लेकिन मौजूदा विधायकों के लिए जनता में जो नाराजगी है, वो पार्टी और गठबंधन पर भारी पड़ सकती है। इसीलिए इस बार बिहार में मुकाबला सत्ता विरोधी लहर और सरकार द्वारा दी जा रह रियायतों के बीच हैं।

जेडीयू के साथ बैठकें शुरू

छत्तीसगढ़ और गुजरात दोनों ही राज्यों के चुनावों में बीजेपी को सफलता मिली थी। इसके अलावा बिहार के एक अन्य नेता ने कहा है कि गुजरात के पैमाने पर बदलाव की अभी कोई संभावना नहीं है लेकिन इस बात से कोई असहमत नहीं है कि बीजेपी को साफ सुथरे चेहरों की जरूरत है। अहम बात यह है कि बीजेपी के नवनियुक्त बिहार चुनाव प्रभारी, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सीट बंटवारे पर जेडीयू के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं।

जीतने वाले प्रत्याशी चाहिए

बीजेपी के एक नेता ने कहा कि इस बार बिहार में 101-104 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, इसलिए उस पर भारी दबाव है, क्योंकि उसे कुछ मौजूदा विधायकों को हटाते हुए भी कई और जीतने लायक उम्मीदवार ढूंढने होंगे। उसके केवल कुछ विधायक जैसे, अमरेंद्र प्रताप सिंह और सीएन गुप्ता 75 साल से ज्यादा की उम्र के हैं, लेकिन उम्र भी कोई बड़ी बाधा नहीं बन सकती है।

झूठ बोलने का आरोप लगाया

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू सीट शेयरिंग के मुद्दे पर सख्त सौदेबाजी कर रही है और फायदा में भी है। उसके 45 मौजूदा विधायक हैं, जिनमें से कई 70 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, और एक नेता के अनुसार वह बिना किसी ज़्यादा हंगामे के अपने 50% तक उम्मीदवार बदल सकती है। खास बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी पर हत्या के मामले में आरोपी बनाने और उम्र के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया था।वहीं एक बीजेपी सांसद ने कहा कि पार्टी को एक नया नैरेटिव गढ़ने की ज़रूरत है और एक तरीका यह होगा कि विश्वसनीय और बेदाग़ चेहरों पर ध्यान केंद्रित किया जाए।