राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव के बालाघाट आगमन के पहले ही पूर्व सांसद कंकर मुंजारे को पुलिस ने नजरबंद कर दिया था। जिनकी लापता होने की जानकारी सोशल मीडिया में छाई रही। लेकिन देर रात उन्हें पुलिस ने रिहा भी कर दिया। इस दौरान पुलिस ने उन्हें कहां से उठाया और कहां ले गयी हैरान करने वाल आरोप उन्होंने मीडिया के समक्ष लगाया। उन्होंने कहा कि नजर बंद बहाना था। हाकफोर्स और एसपी मेरा इनकाउंटर करने के लिए अपहरण किया था। रास्ते में कार चालक मोबाइल पर किसी से बातें कर दिशा निर्देश लेता था।

एक साथ कई मांग रखी
मुंजारे ने बताया कि उन्होने मुख्यमंत्री मोहन यादव के कटंगी आगमन पर उनके घेराव की घोषणा की थी। जहां मांग रखी थी कि किसानों को प्रति हेक्टर 20000रुपए बोनस दिया जाये। कटंगी क्षेत्र के 5 किसानों को बाघ ने मारकर खा गया। उनको 30-30 लाख रुपए प्रत्येक मृतक के परिवार को दिया जाये। लाजी के हजारों करोड़ के डबल मनी कांड में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया जाये और मामले की जांच करवाई जायें। कटंगी के डबल मर्डर कांड के अपराधी को गिरफ्तार करें।
मेरा इनकाउंटर करने की योजना थी
मुंजारे ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के इशारे पर उनके बालाघाट आगमन से पहले ही एसपी एवं हाकफोर्स कमांडेट ने फर्जी इनकाउंटर कर मेरी हत्या की योजना बनाई। मेरे निवास से सुबह 6 बजे सिविल ड्रेस में आकर प्राइवेट कार में अपहरण करके बालाघाट शहर से 156 किलोमीटर दूर घने जंगल नक्सली इलाके में ले गये थे। अपहरण कर फ्लाइओवर ब्रिज से सरेखा, कोसमी, नवेगाव होकर जाने लगे। वे सीधे लाजी पुलिस थाने के आगे निकले। उन्होने लांजी थाने में कार नहीं रोकी। लेकिन बालाघाट शहर में मेरे अपहरण की जानकारी लगते ही शोर शराबा हो जाने और सोशल मीडिया में मेरे समर्थकों द्वारा वीडियो और प्रतिक्रिया कमेंट के कारण मेरी हत्या की योजना सफल नही हो पाई और मेरी जान बच गई।

मुझसे कहा,तुम कुछ नहीं कर सकते
मैंने उनसे पूछा तुम किस थाने के हो और मुझे कहाँ ले जा रहे हो। तब कार चालक बोला कि हम हाकफोर्स से है। उन्होने अभद्र बर्ताव करते हुए लाजी से घोटी ग्राम होते हुये कार को घने जंगल ले जाते हुये मुझसे कहा कि तुम अब कुछ नहीं कर सकते। तब मैं बिल्कुल चुपचाप हो गया। समझ गया कि यह मेरा आखिरी सफर है।
बिरसा पुलिस अच्छी है
मुंजारे ने बताया कि रास्ते में पुलिस थाना देवरबेली, पुलिस थाना लोड्रामा, मछुरदा, पुलिस थाना सालेटेकरी मिला। वहाँ कुछ नहीं किया। तब मैंने सोचा छत्तीसगढ़ ले जायेंगे लेकिन कार उधर नही मुड़ी तब मैंने सोचा कहीं और ले जा रहे हैं। मैंने कचनारी गाँव का बोर्ड देखा। उसके बाद बहेराभाट गाँव, कनिया गाँव फिर दमोह, बिरसा पुलिस थाने में कार मोड़ी। फिर 5 मिनट बाद मुझे वहाँ कार से उतारा गया और पुलिस थाने के अंदर एक कमरे में बैठा दिया गया। मेरे साथ बिरसा की पुलिस ने अच्छा व्यवहार किया।
रिवाल्वर थी पुलिस वालों के पास
मुंजारे ने बताया कि रास्ते में बहुत बार कार रोककर कार ड्राइवर मोटा पुलिस वाला कार के बाहर निकलकर अधिकारियों से मोबाइल पर 5-7 मिनट तक बात करता था। एक अन्य पुलिस वाला भी बाहर निकलकर मोबाइल पर बात करता था। मैं तीनों को चेहरे से पहचान सकता हूँ। तीनों पुलिस वालों के पास रिवाल्वर थी। तीनों पुलिस वालों के मोबाइल के काल डिटेल निकालने पर काफी जानकारी मिल जायेगी। किससे क्या बात करते थे और दिशा-निर्देश एवं आदेश लेते थे। मुंजारे ने बताया कि सफर के दौरान मुझे काफी यातनायें दी गई। मेरा अपहरण करके जिस कार से ले गये थे उसी कार में उन्ही लोगों बालाघाट लाया। मुझे मेरे घर में ही पुलिस लगाकर नजरबंद किया जा सकता था। लेकिन पुलिस ने ऐसा नही किया। वे फर्जी इनकाउंटर में मेरी हत्या करना चाहते थे। मुंजारे ने कहा कि लोकतंत्र में अन्याय का शांतिपूर्वक विरोध करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। मेरी जान ही क्यों न चली जाये मैं अंतिम सांस तक जनता के लिये लड़ता रहूँगा।