एनडीए दो खेमें बंटा हुआ है। नीतीश ने चराग पासवान के खिलाफ अपनी पार्टी के पांच उम्मीदवार उतार दिये हैं। अमित शाह के साथ चराग पासवान,संजय झा और ललन सिंह हैं। नीतीश के साथ जीतन राम मांझी,और उपेन्द्र कुशवाहा। दूसरी ओर तेजस्वी का साथ वीआईपी पार्टी के मुकेश नहीं दे रहे हैं।वो भी अपने उम्मीदवार उतार दिये है।महागठगंधन में बहुत कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। 14 सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने सामने है।
– रमेश कुमार‘रिपु’
इस बार का बिहार चुनाव पहले जैसा नहीं है।क्यों कि कई पार्टी अपनी चमड़ी बचाने में लगी है। एनडीए में फूट है। नीतीश और चाराग पासवान के बीच सियासी 36 का रिश्ता है। पीके की पार्टी स्वराज पार्टी से बीजेपी को खतरा है,ऐसा बीजेपी का सर्वे बता रहा है। इसलिए गुजरात लाबी के निशाने पर पीके की पार्टी है। उन्हें लगता है कि पीके उम्मीदवारों को घर बिठा दें या फिर तोड़ ले अथवा उन्हें नामांकन ही न भरने दें तो बहुत हद तक खतरा कम किया जा सकता है। और मोदी के चाणक्य अमित शाह यही रहे हैं ताकि बिहार का जनादेश बीजेपी के पक्ष में हो जाए। ऐसा ये उस वक्त कर रहे हैं,जब बिहार में संघ मौन बैठकर सियासी तमाशा देख रहा है। वैसे देश में 70 हजार से अधिक संघ की शाखाएं हैं। अकेले बिहार में 1600 शाखाएं लगती है। लेकिन इस बार संघ एकदम से मौन है। वो बिहार की चुनावी फिजा से दूर है। जबकि चुनाव में संघ अपनी पूरी ताकत झोंक देता है। बिहार चुनाव में संघ कोई सियासी चालें नहीं चल रहा है। अपने को दूर कर लिया है।ऐसे मंे गुजरात लाबी को ही सब कुछ करना है।

पीके के उम्मीदवारों में खौफ
यह सर्वविदित है कि गुजरात लाबी के हाथ से किसी भी राज्य का चुनाव हाथ से निकलने लगता है तो वो हर हथकंडे अपनाती हैं। इन पर आरोप है कि प्रशांत किशोर की जनस्वराज पार्टी के 14 उम्मीदवारों को नाम वापस लेने को कहा गया है। पीके ने पटना में प्रेस वार्ता कर खुल कर गृहमंत्री पर आरोप लगाए हैं।उन्होंने मीडिया के समक्ष तस्वीरंे पेश की है। जिसमें उनके उम्मीदवार को गृहमंत्री दिन भर अपने साथ बिठाए रखे ताकि वो नामांकन न भर सकंे।
धमकाने की सियासत शुरू
प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि बिहार चुनाव में ठीक सूरत कांड दोहराया गया। प्रशांत के मुताबिक जिस तरह लोकसभा चुनाव के दौरान सूरत में बीजेपी ने विरोधी उम्मीदवारों को बैठा दिया था,उसी तरह बिहार की तीन महत्वपूर्ण सीटों दानापुर, गोपालगंज और ब्रह्मपुर पर जन सुराज के प्रत्याशियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य भाजपा नेताओं ने धमकाकर और दबाव बनाकर नामांकन दाखिल करने या चुनाव लड़ने से रोका है। पीके ने अपने आरोपों के समर्थन में भाजपा नेताओं के साथ बैठे जन सुराज के उम्मीदवारों की तस्वीरें भी मीडिया को दिखाईं।

नामांकन करने से अमित ने रोका
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि दानापुर सीट से जन सुराज के उम्मीदवार अखिलेश कुमार उर्फ मुटुर साव के अगवा होने की खबर झूठी थी। उन्होंने बताया कि उन्हें किसी ने किडनैप नहीं किया बल्कि,अमित शाह और भाजपा के नेताओं ने मुटुर साव को धमकाकर नामांकन दाखिल करने से रोका। पीके ने इसकी पुष्टि के लिए मुटुर साव की गृह मंत्री के साथ मुलाकात की तस्वीर मीडिया को दिखाई। इसी तरह बक्सर की ब्रह्मपुर सीट से प्रत्याशी डाॅ सत्यप्रकाश तिवारी पर भी केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अन्य भाजपा नेताओं द्वारा दबाव बनाने का आरोप लगाया गया। पीके ने सत्यप्रकाश तिवारी के घर पर हुई मीटिंग की फोटो भी दिखाई, जिसके बाद उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया था। गोपालगंज सीट पर भी जन सुराज के प्रत्याशी डाॅ शशि शेखर सिन्हा पर स्थानीय भाजपा एमएलसी और नेताओं ने दबाव बनाकर नामांकन वापस करा दिया।प्रशांत किशोर ने इन घटनाओं को लोकसभा चुनाव के दौरान गुजरात के सूरत में हुए कांड की पुनरावृत्ति बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के शीर्ष नेता खुलेआम लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं और विरोधियों को चुनाव लड़ने से रोक रहे हैं।

पीके से बीजेपी को नुकसान
प्रशांत किशोर का आरोप है कि बिहार में चुनाव आयोग बीजेपी के लिए पाटर्नर की भूमिका निभा रहा है।बीजेपी की गाड़ियों में साड़ियां बंट रही है। पैसा बंट रहा है। जानकारों का कहना है कि बिहार का चुनाव पीके की वजह से बीजेपी का फंसता जा रहा है। इसलिए गुजरात लाबी सत्ताई सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। जाहिर सी बात है विपक्ष का प्रेशर बीजेपी पर अधिक है। वोटों को खरीदने और डराने का अचार संहित लागू है। बीजेपी का चाल चरित्र चेहरा पर विपक्ष का सीधा सीधा आरोप है।इसलिए कि बीजेपी के खिलाफ मजबूती से जो पार्टी चुनाव लड़ रही हंै,उनके खिलाफ घेराबंदी की जा रही है।उन्हें डरा,धमका कर घर बिठाया जा रहा है।बिहार का वोटर कह रहा है अभी प्रशांत किशोर के उम्मीदवारों के साथ जो खेल हो रहा है,वही खेल आरजेडी,कांग्रेस,लेफ्ट आदि के साथ हो सकता है। अभी तो मिथलांचल और पाटिल पुत्र में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवारों को धमका कर घर बिठाया जा रहा है।

पीके से बीजेपी क्यों डर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पीके से बीजेपी को डर क्यों है? चूंकि सवर्ण वोटर और पढ़ा लिखा शहरी वोटर बीजेपी का वोट बैंक है। और यही वोट बैंक पीके का भी है।पीके जेडीयू,चराग पासवान,एनडीए और आरजेडी के वोट बैंक का भी नुकसान कर सकते हैं। बीजेपी का आंतरिक सर्वे बता रहा है कि पीके की जनस्वराज पार्टी बीजेपी का दस से पन्द्रह सीटों पर नुकसान कर सकती हैं।राजनीति में एक-एक सीट पर जीत जरूरी है,ऐसे में इतना नुकसान पीके की वजह से होने से गुजरात लाबी की नींद उड़ना स्वभाविक है।

सभी दलों में खींचतान
वहीं महागठगंधन में बहुत कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। 14 सीटों पर महागठबंधन के उम्मीदवार आमने सामने है। अशोक गहलोत लालू यादव और तेजस्वी यादव से मिलकर कोई नया हल निकाल लेते हैं,तो गुजरात लाबी को नुकसान हो सकता है। एनडीए दो खेमें बंटा हुआ है। नीतीश ने चराग पासवान के खिलाफ अपनी पार्टी के पांच उम्मीदवार उतार दिये हैं। अमित शाह के साथ चराग पासवान,संजय झा और ललन सिंह हैं। नीतीश के साथ जीतन राम मांझी,और उपेन्द्र कुशवाहा। दूसरी ओर तेजस्वी का साथ वीआईपी पार्टी के मुकेश नहीं दे रहे हैं।वो भी अपने उम्मीदवार उतार दिये है।जबकि हैं महागठबंधन का हिस्सा। जाहिर सी बात है कि बिहार में बगैर संघ के विपक्ष मजबूती से लड़ता है तो एनडीए गठबंधन को नुकसान पहुंचा सकता है। गुजरात लाबी पर जो आरोप लग रहे हैं,उसका जवाब अभी तक आया नहीं है।जैसा की मोहनिया विधान सभा की राजद प्रत्याशी श्वेता सुमन कहती है कि मेरा नामांकन रद्द कराया गया है। शुरूआती चुनावी फिजा बता रही है कि बिहार में संाप सीढ़ी वाली सियासत में कईयों को सांप डसेगा और कइयों को सीढ़ी मिलेगी।

– रमेश कुमार‘रिपु’
