राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर जी राम की। इस पर विपक्ष को एतराज है।कांग्रेस मनरेगा बाचाओ अभियान चला रही है। इस अभियान के तहत पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजयसिंह बालाघाट दौरे पर पहुंचे और नक्सल प्रभावित ग्राम सोनगुड्डा में ग्रामीणों से मुलाकात कर बैठक की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी।आज नक्सलवाद खत्म करने के पीछे सरकार की मंशा जंगलों को उद्योगपतियों को सौंपने की है।

काम का अधिकार खत्म हो गया
राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि पहले पंचायतों में काम की मांग करने पर 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य था, लेकिन नई व्यवस्था में यह अधिकार समाप्त होने का खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरी कम होने की आशंका है और पंचायतों की भूमिका घटाकर काम ठेकेदारों को दिए जाने की तैयारी की जा रही हैए जिससे ग्रामीण रोजगार पर असर पड़ेगा।
मजदूरों को काम देने में कटौती
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिह का सीधा आरोप है कि पहले मनरेगा का पूरा भुगतान केंद्र सरकार करती थी लेकिन अब इसका आर्थिक बोझ राज्यों पर भी डाला जाएगा। मप्र सरकार की हालत क्या है सबको पता है। इससे राज्य सरकारें खर्च कम करने के लिए मजदूरों को काम देने में कटौती कर सकती हैं। उन्होने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार योजना नहीं बल्कि ग्रामीण गरीबों का अधिकार है। जिसे कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
आदिवासियों की समस्या खत्म नहीं हुई
सोनगुड्डा में आयोजित बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह ने आदिवासी मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए वे आदिवासियों के साथ आखिरी सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमितशाह के उस बयान पर सवाल उठाया जिसमें मध्यप्रदेश में नक्सलवाद समाप्त होने का दावा किया गया था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि नक्सलवाद खत्म हो गया है लेकिन आदिवासियों की समस्याएं कब खत्म होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद खत्म करने के पीछे सरकार की मंशा जंगलों को उद्योगपतियों को सौंपने की है ताकि खनिज संसाधनों का दोहन किया जा सके।