राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। नगर के गायखुरी स्थित सरदार पटेल मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल में एनेस्थीसिया के गलत डोज के कारण एक युवक गहरी अचेता अवस्था में पहुंच गया। जिसे चिकित्सकीय भाषा में कोमा माना जाता है। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश व्याप्त है,वहीं स्वास्थ्य विभाग ने तकनीकी जांच प्रारंभ कर दी है।

हाथ की उंगली में फ्रेक्चर था
बताया गया है कि नगर के वार्ड क्रमांक 13 बूढ़ी निवासी विवेक त्रिरपुंडे 10 फरवरी की रात्रि मोटरसाइकिल दुर्घटना में घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनके सिर, हाथ एवं पैर में चोटें आईं। परिजन उन्हें तत्काल उपचार हेतु उक्त निजी अस्पताल लाए। जहां प्रारंभिक जांच के बाद हाथ की उंगली के समीप फ्रैक्चर बताया गया। परिजनों का स्पष्ट आग्रह था कि मरीज का केवल प्राथमिक उपचार किया जाए। जिस पर चिकित्सकीय सहमति भी जताई गई।
पुनः एनेस्थीसिया का हाई डोज दिया
आरोप है कि 11 फरवरी की शाम लगभग 4 बजे बिना स्पष्ट जानकारी के मरीज को अचानक आॅपरेशन थिएटर शिफ्ट कर दिया गया। यहां कथित रूप से रीजनल ब्लाक एनेस्थीसिया दिया गया। जिसका अपेक्षित न्यूरल रिस्पान्स प्राप्त नहीं हुआ। मानक एनेस्थीसिया प्रोटोकाल के अनुसार ऐसी स्थिति में डोज कैलिब्रेशन ड्रग रिव्यू, वाइटल मानिटरिंग एवं एनेस्थीसिया रिवर्सल असेसमेंट आवश्यक होता है। किन्तु परिजनों का आरोप है कि ऐसा न करते हुए पुनः एनेस्थीसिया का हाई डोज दिया गया, जिससे पूरा शरीर ब्लाक अवस्था जनरलाइज्ड न्यूरो.मस्कुलड में चला गया।

अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप
सामान्य भाषा में परिजनों के अनुसार युवक कोमा में चला गया है। जब 18 घंटे तक भी मरीज में कोई न्यूरोलाजिकल रिकवरी नहीं हुई, तब स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12 फरवरी को उसे क्रिटिकल कंडीशन में नागपुर के किंग्स.वे अस्पताल में रेफर किया गया। उसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए कार्रवाई की मांग की जिसके बाद पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग मौके पर पहुंचे।
चार सदस्यीय टीम जांच करेगी
इधर स्वास्थ्य विभाग ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चार सदस्यीय विशेषज्ञ जांच दल गठित किया है। टीम द्वारा एनेस्थीसिया ड्रग चार्ट डोज कैलकुलेशन, प्री.एनेस्थेटिक चेकअप रिपोर्ट वाइटल मानिटरिंग रिकार्ड, कंसेंट डाक्यूमेंटेशन एवं ओटी लागबुक का टेक्निकल आॅडिट किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दंडात्मक एवं वैधानिक कार्रवाई तय होगी। जाचं दल क्लिनिकल नेग्लिजेंस, एनेस्थीसिया ओवरडोज, इंफार्म्ड कंसेंट वायलेशन एवं ओटी सेफ्टी प्रोटोकाल ब्रेच जैसे बिंदुओ पर जांच कर रही है।
अनुभवहीन चिकित्सक हैं
सूत्रों की मानें तो अस्पताल में हाल ही में अनुभवहीन चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। जिनसे अत्यधिक कार्य करवाये जा रहे है। कथित रूप से 10.10 घंटे लिए जा रहे हैं। जहां यह स्थिति क्लिनिकल फटीग और मेडिकल एरर रिस्क को बढ़ाती है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन द्वारा 500 बिस्तर की अनुमति हेतु प्रयास भी जारी बताए जा रहे हैं। जिससे संस्थागत विस्तार की होड़ में क्लिनिकल सेफ्टी से समझौते की आशंका व्यक्त की जा रही है। यदि उक्त आरोपो की पुष्टी होती है तो यह केवल व्यक्तिगत चिकित्सकीय त्रुटि नहीं, बल्कि सिस्टमेटिक हास्पिटल सेफ्टी फेल्योर का मामला माना जाएगा। फिलहाल इस मामले में पूरे जिले की नजर स्वास्थ विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है।