राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। जिले में पिछले चार दिनों से बारिश हो रही है।जिससे किसानों की चिंता बढ़ गयी है। कटी हुई फसल को सुरक्षित करने में लगे है। खरीफ फसल के रूप में कम समय में पक कर धान तैयार हो गयी है। किसान कटाई भी प्रारंभ कर दिये हैं। लेकिन बारिश होने से किसान परेशान हैं। मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट में 26 से 29 अक्टूबर तक गरज के साथ छीटें पड़ने की आशंका है।

गरज के साथ हल्के छीटे भी
बेमौसम बारिश से किसान पेरशान हैं। कई किसान फसल की कटाई भी शुरू कर दिये थे। ऐसे में उनके सामने समस्या है कि उन्हे सुरक्षित कैसे रखें। मौसम विभाग के अनुसार बालाघाट में 26 से 29 अक्टूबर को हल्की बारिश के साथ आंधी की भी आशंका है। आसमान में बादल छाये रहेंगे कहीं कहीं गरज के साथ छीटे भी पड़ेंगे।
दलहन फसल को क्षति की आशंका
बिगड़ते मौसम से ना सिर्फ धान की फसल को नुकसान होगा, बल्कि खेतों में लगी तुअर, उड़द, तील की फसल के अलावा सब्जियों को भी नुकसान होगा। ऐसी बारिश से पौधे में लगे फूल झड़ने व पत्तिया गलने के आसार बढ़ जाते है। बहरहाल किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के प्रति एहतियात बरतने की आवश्यक्ता है और धान की फसल की कटाई के लिये मौसम साफ होने का इंतजार करना पड़ेगा।
नरवाई जलाने पर प्रतिबंध
किसान फसल कटाई उपरांत किसान पराली जलाने का कार्य करते है। जिसे लेकर कृषि विभाग ने एडवाईजरी जारी की है कि मृदा और पर्यावरण स्वास्थ्य को बचाने के लिए धान की पराली और नरवाई को न जलाएं। धान की पराली व नरवाई जलाने से मृदा और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। जो कि हानिकारक व नुकसानदेय है। अधिकारियों का मानना है कि नरवाई व धान जलाने से मृदा के पोषक तत्वों जैसे कि नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम और सल्फर का नुकसान होता है। मिट्टी के गुणों पर भी फसल अवशेष जलाने से पोषक तत्व के नुकसान के अलावा मिट्टी का तापमान,पीएच, नमी, उपलब्ध फास्फोरस और मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ भी प्रभावित होते हैं। नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण भी होता है।नरवाई जलाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।