करोड़पति पंचायतों में राजनीति के चलते विकास कार्य ठप - rashtrmat.com

करोड़पति पंचायतों में राजनीति के चलते विकास कार्य ठप

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। जिले में668 ग्राम पंचायतें हैं।लेकिन ऐसी कई पंचायतें हैं कि जिनके खाते में करोड़ो रुपए हैं। राजनीति के चलते विकास काम ठप हैं।ऐसी भी ग्राम पंचायतें हैं जिनके पास पैसे नहीं होने की वजह से काम नहीं हो रहे हैं।दस पंचायतें ऐसी हैं जिनके खाते में उम्मीद से अधिक राशि है।


टाप की करोड़पति पंचायतें
बालाघाट जिले की टाप ग्राम पंचायत ऐसी भी है जो कि करोड़पति है जिसमे सर्वाधिक राशि ग्राम पंचायत कोसमी के पास 2.23 करोड़, ग्राम पंचायत भरवेली बालाघाट 2.12 करोड़, ग्राम पंचायत हीरापुर के पास 1.22 करोड़, ग्राम पंचायत तिरोड़ी कटंगी 1.10 करोड, ग्राम पंचायत पंढरवानी लालबर्रा के पास 1.70 करोड़,ग्राम पंचायत चांगोटोलाय एक करोड़, ग्राम पंचायत उकवाय परसवाड़ा के पास 1..95 करोड़ रूपये है। वहीं जिले की लगभग 50 ग्राम पंचायत के पास 50 लाख से 1 करोड़ तक राशि है। ज्ञात हो की जो करोड़पति ग्राम पंचायतें हंै वे बड़ी राशि जमा होने के बाद भी विकास कार्य नहीं करा पाए है।
इसलिए खातें में पड़ी है राशि
पंचायत राज पोर्टल के मुताबिक पंचायतों के खाते में करोड़ो रुपए होने के बाद भी विकास के काम नहीं हो रहे हैं। जिससे खाते में राशि पड़ी हुई हैं। उक्त ग्राम पंचायतांे में सर्वाधिक जनपद पंचायत बालाघाट की चार और लालबर्रा, परसवाड़ा, कटंगी जनपद पंचायत की एक- एक ग्राम पंचायत शामिल है। इस समय पिछले लगभग डेढ़ माह सें ग्राम पंचायतो के सभी इंजीनियर हड़ताल पर हैं। इस लिए भी कार्य प्रभावित हो रहा है। बालाघाट जिले की लगभग 7.8 ग्राम पंचायतों में करोड़ से अधिक राशि है तो लगभग 52.55 ग्राम पंचायतों में 50 लाख से अधिक की राशि खातों मे जमा है। पंचायतों के खातों में करोड़ों का फंड जमा होने के कई कारण हैं। जिनमें फंड का समय पर इस्तेमाल न होना, भ्रष्टाचार और योजनाओं के कार्यान्वयन में देरी।

वित्तीय अनियमितताएँ
अक्सर फंड का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जाता है। जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग होता है। कई मामलों में विकास कार्यों के लिए फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाकर राशि हड़प ली जाती है।जहाँ बालाघाट जिले मे सरपंच और पंचायत सचिवों द्वारा फंड को व्यक्तिगत खातों में डालकर उसका गबन करने के भी मामले सामने आए हैं।
प्रतिनिधियों की आपसी खींचतान
कई बार देखा जाता है कि प्रतिनिधियों की खींचतान के कारण विकास कार्य रुक जाते हैं। जिससे फंड का इस्तेमाल नहीं हो पाता। जिसका ताजा व बड़ा उदाहरण भरवेली पंचायत मे देखने मिल रहा है। वहीँ ग्रामीण लोग अक्सर अपनी पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों और फंड के इस्तेमाल से अनजान हैं। जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।


फंड का सही इस्तेमाल नहीं
पंचायतों में प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण सही निर्णय लेने और फंड का सही इस्तेमाल करने में दिक्कतें आती हैं। कई पंचायत सदस्यों को अपने काम के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और कौशल की कमी,काम में अक्षमता, कई मामलों में पंचायतों में खर्च की गई राशि का सही हिसाब-किताब नहीं रखना भी एक वजह है। हाल ही में कई पंचायतों में करोड़ों की अनियमितता का खुलासा हुआ था। वहीँ वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं के हस्तक्षेप से भी पंचायतों की जवाबदेही पर असर पड़ा। इन समस्याओं को दूर करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाना आवश्यक है। ग्राम सभा की बैठकों को नियमित रूप से आयोजित करना और उसमें ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। साथ ही ग्रामीणों को पंचायत के फंड और कार्यों के बारे में जानकारी देना चाहिए। जहाँ आर.टी.आई के इस्तेमाल से पंचायत फंड से जुड़े घोटालों का पर्दाफाश किया जा सकता है।
इनका कहना है
पछले चार माह से बारिश के कारण कार्य रुके हुए थे।अब बारिश खत्म हो गई है।उम्मीद तो अब यही है कि पंचायतो मे विकास कार्यो को रफ्तार मिलेगी। हमारी पंचायत मे जल्द ही नए कार्य शुरू करवाये जायेंगे।
अनीश खान, सरपंच
ग्राम पंचायत पांढरवानी, लालबर्रा