राष्ट्रमत न्यूज नई दिल्ली/भोपाल/रीवा(ब्यूरो)। मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला यानी स्वास्थ्य मंत्री को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि रीवा के गायनी विभाग में बच्चे जल कर मर जाएं अस्पताल के पास फायर एनओसी हो या न हो,आग लगती है तो लग जाए। उनके गृह जिला में बगैर अनुमति के नर्सिग हास्पीटल खुले हैं तो खुले रहें। मरीज मरते हैं तो मरे। प्रदेश के बच्चे जहरीली कफ सिरप पीकर मर जाएं,या फिर उन्हें एचआईवी ब्लड चढ़ा दिया जाए,उनके गृह जिला में नकली दवा बिके, नशीली कोरेक्स बिकती है तो बिके। बालाघाट में महिला चिकित्सक ऑपरेशन न करे और महिला की मौत हो जाए। विपक्ष उनके खिलाफ प्रदर्शन करे,प्रदेश कें अस्पतालों में कुछ भी जाए.. इनको क्या? विपक्ष कहता है कि डिप्टी सीएम को जमीन बेचो मंत्रालय का मंत्री बना देना चाहिए।

शुक्ला नहीं चाहते स्वास्थ्य मंत्रालय
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक से बढ़कर एक कारनामे हो रहे हैं। लेकिन मजाल है स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के चेहरे पर कोई शिकन पड़े।उनके ही पार्टी के लोग कहते हैं उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय नहीं संभल रहा है। वो ज्यादातर रीवा के संजय गांधी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ज्यादा ध्यान देते हैं। बावजूद इसके संजय गांधी अस्पताल के गायनी विभाग में एक बच्चा जल कर मर जाता है। यहां आए दिन दोनों अस्पतालों में गंभीर हादसे होते रहते हैं। मरीजों को स्ट्रेचर तक नहीं मिलता। मध्य प्रदेश के सतना में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का मामला सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाईयां मरीजों को दी जा रही है। डिप्टी सीएम की रूचि का मंत्रालय नहीं मिलने से,वो इसे तवज्जो नहीं दे रहे हैं। वो चाहते हैं कि उनका मंत्रालय बदल दिया जाए। लेकिन मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव और उनके बीच 36 का सियासी रिश्ता है। यही वजह है कि वो प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष भी नहीं बन पाए।

प्रदेश के अस्पताल को मोतियाबिन्द
डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला अपने राजनीतिक क्षेत्र रीवा को मेडिकल हब बनाने की बात अपने हर भाषण में करते हैं। लेकिन हैरानी वाली बात है कि उनसे स्वास्थ्य मंत्रालय नहीं संभल रहा है।बालाघाट में गायनी की डाॅक्टर यह कहकर महिला का आॅपरेशन नहीं करती कि उनकी ड्यूटी का समय खत्म हो गया है।वो चली जाती हैं। वहां अमानक दवाईयां मिलने से महिलाएं बीमार हो गयी। उनके शहर रीवा में नकली दवाईयां अस्पताल से लेकर दुकानों तक बिकती हैं। अन्नूपूर्ण मेडिकल के संचालक ने यह बात खुलकर कह चुका है।रीवा के लोगों का कहना है कि डिप्टी CM का ज्यादातर घ्यान रीवा की जमीन बचेने में रहता है। यही वजह है कि मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पताल को मोतिया बिन्द हो गया है। डिप्टी सीएम की वजह से प्रदेश में जहरीली कफ सिरप की वजह से 27 बच्चे मर गये।विपक्ष उनसे इस्तीफा मांगता रहा और वो अनैतिकता की शाल ओढ़े बैठे रहे।

HIV ब्लड चढ़ा दिया
नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर निर्भर 4 बच्चों के एचआईवी पाजिटिव पाए जाने के बाद राज्य सरकार हरकत में आई है। जांच में सामने आया है कि ये चारों बच्चे पहले आईसीटीसी जांच में एचआईवी नेगेटिव थे लेकिन बाद की जांच में उनकी रिपोर्ट पाजिटिव आई। बच्चों की उम्र 8 से 11 साल के बीच है और वे लंबे समय से थैलेसीमिया से पीड़ित हैं। ब्लड ट्रांसफ्यूजन को ही संक्रमण का मुख्य संभावित कारण माना जा रहा है।

डोनरों की पहचान हो रही
तफ्तीश में यह बात उजागर हुई है कि चारों बच्चे करीब 200 ब्लड डोनर के संपर्क में आए और 3 अलग.अलग ब्लड बैंकों के जरिए अब तक 189 यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है। अब सभी संभावित डोनरों की पहचान कर उनकी जांच की जा रही है।

तीन निलंबित
संक्रमित खून चढ़ाने के मामले में पब्लिक हेल्थ और फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट ने डाॅ योगेश भरसत सीईओ आयुष्मान भारत की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय समिति की शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की है। जिन लोगों को सस्पेंड किया गया है उनमें डाॅ देवेंद्र पटेल पैथोलाजिस्ट और ब्लड बैंक इंचार्ज राम भाई त्रिपाठी लैब टेक्नीशियन और नंदलाल पांडे लैब टेक्नीशियन शामिल हैं।सतना जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन डाॅ मनोज शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 16 दिसंबर 2025 को स्टेट ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल के डायरेक्टर डाॅ योगेश भरसत आईएएस की अध्यक्षता में एक राज्य.स्तरीय समिति बनाई गई थी। इसकी शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।