राष्ट्रमत न्यूज,बीजापुर(ब्यूरो)। उसूर से पेरमपल्ली जाने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत बनी सड़क इन दिनों किसी शोध संस्थान से कम नहीं लग रही है। यहां मरम्मत के नाम पर ठेकेदार ने सिविल इंजीनियरिंग की ऐसी “नई विधि” ईजाद कर दी है, जिसे देखकर तकनीकी संस्थानों को भी शायद पाठ्यक्रम बदलना पड़ जाए।सड़क की मरम्मत अब पुराने ढर्रे पर नहीं की जा रही। गड्ढों को भरने, परत को दुरुस्त करने या सड़क को मजबूत बनाने की बजाय ठेकेदार ने अपनाया है- केमिकल डालकर उस पर सीमेंट का छिड़काव, और इसे ही नाम दे दिया गया है “मेंटेनेंस”।

सीमेंट छिड़काव: नई खोज
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर जहां-तहां केमिकल डाला जाता है और फिर ऊपर से सीमेंट छिड़क दिया जाता है। कुछ घंटों तक सड़क चमकती है, मानो किसी समारोह के लिए सजाई गई हो। मगर यह चमक उतनी ही अस्थायी साबित होती है, जितनी चुनावी वादों की यादें। ग्रामीणों का कहना है कि यह तरीका शायद ठेकेदार की निजी प्रयोगशाला में तैयार किया गया है, क्योंकि न तो इससे सड़क मजबूत होती है और न ही टिकाऊ बनती है। लेकिन देखने में जरूर ऐसा लगता है कि कोई बहुत बड़ा तकनीकी कारनामा कर दिया गया है।
राहगीरों के लिए “सरप्राइज पैकेज
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा राहगीरों को “सरप्राइज” के रूप में मिलता है। कहीं अचानक फिसलन, तो कहीं उखड़ा हुआ सीमेंट यात्रियों को हर सफर में नया रोमांच देता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह सड़क किसी एडवेंचर ट्रैक से कम नहीं रह गई है।

PMGSY की सड़क बनी प्रयोगशाला
पीएमजीएसवाई जैसी महत्वाकांक्षी योजना की सड़क अब ठेकेदार के नवाचार का मंच बन चुकी है। जहां आमतौर पर सड़कें विकास का रास्ता बनती हैं, वहीं यहां सड़क खुद प्रयोग का विषय बन गई है।
ग्रामीणों में तंज और नाराजगी
ग्रामीण व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि अब शायद इंजीनियरिंग कॉलेजों में “उसूर मॉडल” पढ़ाया जाएगा -“कैसे केमिकल और सीमेंट छिड़ककर सड़क को कागजों में दुरुस्त दिखाया जाए।” लोगों का कहना है कि सड़क कुछ दिनों के लिए सफेद हो जाती है, लेकिन हालात वही पुराने रहते हैं। चमक के पीछे छिपी सच्चाई सब देख रहे हैं, पर व्यवस्था आंख मूंदे बैठी है।
दिखावटी मरम्मत से नहीं बदलते हालात
उसूर–पेरमपल्ली सड़क की हालत यह बता रही है कि विकास केवल कागजों और छिड़काव से नहीं आता। जब तक मरम्मत दिखावे से ऊपर नहीं उठेगी, तब तक सड़क पर चलने वाला हर व्यक्ति इस “इंजीनियरिंग प्रयोग” का अनचाहा हिस्सा बना रहेगा।