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अब हम वाई–फाई–सक्षम प्राणी हो गए हैं। हमारी स्मृति क्लाउड में है, भावनाएँ इमोजी में और…
रमेश कुमार ‘रिपु’ बता रहे हैं यदि रजाई भी आधार से लिंक कराना पड़ा तो क्या…
इस देश में अब नेता नहीं, कथावाचक पैदा हो रहे हैं—माइक हाथ में, इतिहास जेब में…
सूचना-तंत्र दरअसल एक ‘साइकोलॉजिकल बूचड़खाना’ है जहाँ हर सुबह विवेक की बलि दी जाती है और…
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