भिलाई में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई,30 हजार की बनी सूची - rashtrmat.com

भिलाई में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई,30 हजार की बनी सूची

राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर/दुर्ग(ब्यूरो)। दुर्ग जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए पुलिस प्रशासन ने भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) और अन्य उद्योगों में कार्यरत करीब 30 हजार ठेका श्रमिकों और कर्मचारियों की विस्तृत सूची तैयार की है। संदिग्धों का सत्यापन करने के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की एक टीम को कोलकाता भेजा गया है।

Police take major action against Bangladeshi infiltrators in Bhilai, investigation intensified, list of 30,000

प्राथमिकी वापस लेने का प्रस्ताव

पुलिस विभाग बीएसपी और अन्य संयंत्रों में काम करने वाले संदिग्धों का पूरा ब्योरा तैयार कर रहा है, ताकि नियम के तहत आगे की विधिक कार्रवाई की जा सके। जिन बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, उनके संदर्भ में राज्य सरकार के माध्यम से प्राथमिकी वापस लेने का प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद उन्हें वापस भेजने यानी डिपोर्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की गई है।

स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं
इससे पहले भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत 1,188 श्रमिकों के दस्तावेज की सघन जांच की गई थी। इस जांच के दौरान सात बांग्लादेशी नागरिकों को पहचान छिपाकर काम करते पकड़ा गया था, जिन्हें अदालत के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया। जांच सूची में शामिल 101 लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी थी। इनमें से 45 व्यक्तियों का भौतिक सत्यापन कराया गया। इसके अतिरिक्त बिना मुसाफिरी दर्ज कराए रह रहे 777 लोगों को चिह्नित किया गया। इनमें से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले 160 लोगों के स्थायी पते पर संदेह पत्र (सस्पेक्ट रोल) भेजे गए हैं।

फर्जी पहचान पत्र और घुसपैठ का तरीका
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि बांग्लादेशी नागरिक भारत सीमा में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले कोलकाता पहुंचते हैं। वहां स्थानीय संपर्कों और बिचौलियों की मदद से वे देश के अन्य राज्यों में चले जाते हैं। फर्जी दस्तावेज के सहारे अलग-अलग शहरों में रहने लगते हैं और फिर धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर अपने नए पहचान पत्र बनवा लेते हैं। दुर्ग जिले में भी ऐसे कई मामले उजागर हुए हैं, जहां फर्जी पहचान पत्र के आधार पर बांग्लादेशी नागरिक बरसों से रह रहे थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *