अधिवक्ताओं को धरने की अनुमति नहीं मिली,HC जाने की चेतावनी दी - rashtrmat.com

अधिवक्ताओं को धरने की अनुमति नहीं मिली,HC जाने की चेतावनी दी

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। यूजीसी रोलबैक और जातिगत आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन की अनुमति जिला प्रशासन ने अधिवक्ताओं को नहीं दी। इससे नाराज अधिवक्ताओं ने हाई कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। नाराज अधिवक्ताओं का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार भी नहीं दिया जा रहा है।

अनुमति नहीं मिलने पर हाई कोर्ट जाएंगे
रीवा में यूजीसी रोलबैक और जातिगत आरक्षण के विरोध में धरना.प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने का मामला अब अपनी दिशा बदलता जान पड़ रहा है। जिले के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शासन और जिला प्रशासन पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाते हुए कहा कि कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है। लेकिन उन्हें प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा रही है।हम प्रशासन से दोबारा धरना प्रदर्शन के अनुमति की मांग करेंगे अगर अनुमति नही दी गई तो हाईकोर्ट जाएंगे।

प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी

दरअसल, वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद तिवारी, बीके माला सहित सामान्य वर्ग के अन्य बुद्धिजीवियों ने बीते 1 अक्टूबर को जिला प्रशासन को आवेदन सौंपकर 17 अक्टूबर से कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। यह प्रदर्शन यूजीसी रोलबैक, जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी से जुड़े मुद्दों के विरोध में प्रस्तावित था। हालांकि, अधिवक्ताओं के मुताबिक कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई।

धरने का निर्णय लिया गया था

वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद तिवारी ने आरोप लगाया कि सामान्य वर्ग के लोगों की समस्याओं और चिंताओं को लेकर अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण धरने का निर्णय लिया गया था।, लेकिन अनुमति नहीं मिलने से उन्हें निराशा हुई है ।उन्होंने सामान्य वर्ग के लोगों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी जाति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि संबंधित नीतियों और मुद्दों पर अपनी असहमति लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराना है। वहीं, अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई, तो वे अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे ।अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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