कान्हा में सौ साल बाद असम के आठ भैसों की वापसी - rashtrmat.com

कान्हा में सौ साल बाद असम के आठ भैसों की वापसी

*कान्हा में 50 भैंसों को बसाने की योजना
*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़े बाड़े में छोड़ा

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। विश्व प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार पहुंचे, जहां उन्होंने असम के काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसों को छोटे बाड़े से निकालकर बड़े बाड़े में छोड़ा। इन जंगली भैंसों को पिछले करीब छह महीनों से सूपखार स्थित छोटे बाड़े में क्वारंटाइन रखा गया था।
जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन
 मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई इस प्रक्रिया को कान्हा में जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। करीब 100 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों की आबादी को फिर से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल प्रदेश में जैव विविधता के संरक्षण और दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य
  जंगली भैंसे, जिन्हें एशियाई वाइल्ड बफैलो के नाम से भी जाना जाता है, वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनके पुनर्स्थापन से कान्हा के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलने और क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध करने की उम्मीद है। वन्यजीव संरक्षण की इस योजना के तहत कान्हा टाइगर रिजर्व में लगभग 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा गया है। असम के काजीरंगा से लाए गए आठ भैंसों को बड़े बाड़े में स्थानांतरित करना इसी व्यापक योजना का हिस्सा है।
पुनर्स्थापन योजना को आगे बढ़ाया जाएगा
 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुई इस पहल से कान्हा में जंगली भैंसों की स्थायी आबादी विकसित करने की उम्मीद बढ़ी है। आने वाले समय में इनके अनुकूलन, स्वास्थ्य और संरक्षण पर निगरानी रखते हुए पुनर्स्थापन योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

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