राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। विश्व धरोहर स्थल महाबोधि महाविहार बोधगया के प्रबंधन को बौद्ध समुदाय को सौंपने की मांग को लेकर बौद्ध समाज ने 10 मार्च को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने रैली निकाली और जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

बौद्ध समाज के हाथों में सौंपी जाए
बौद्ध समाज ने बताया गया कि महाबोधि महाविहार भगवान गौतम बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति की पवित्र स्थली है और विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस पवित्र स्थल का निर्माण सम्राट अशोक महान द्वारा ईण्पूण् 200 में कराया गया था और ऐतिहासिक रूप से इसका संरक्षण बौद्ध समुदाय करता आया है।बिहार के बोधगया में स्थित ‘महाबोधि मंदिर’ का पूरा कामकाज और देखरेख बौद्ध समाज के हाथों में सौंपी जाए।
लड़ाई 135 सालों से चल रही
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भंते धम्मशिखर ने बताया कि यह लड़ाई पिछले 135 सालों से चल रही है। उनका कहना है कि 1949 के एक पुराने कानून (BTMC एक्ट) की वजह से इस मंदिर का मैनेजमेंट गैर-बौद्धों के पास है। बौद्ध समाज चाहता है कि इस कानून को खत्म किया जाए ताकि मंदिर का संचालन बुद्ध की परंपराओं और रीति-रिवाजों के हिसाब से हो सके।

कब्जा मुक्त हो मंदिर: मंदिर के मैनेजमेंट से गैर-बौद्धों को हटाकर पूरी जिम्मेदारी बौद्धों को दी जाए।पुराना कानून खत्म हो: 1949 का मैनेजमेंट एक्ट तुरंत रद्द किया जाए।केस वापस लिए जाएं: आंदोलन के दौरान जिन बौद्ध भिक्षुओं और साथियों पर पुलिस केस दर्ज हुए हैं, उन्हें खत्म किया जाए।दखलअंदाजी बंद हो: बिहार सरकार और प्रशासन इस धार्मिक मामले में बेवजह दखल देना बंद करे।इससे पहले आंबेडकर चौक पर बड़ी संख्या में लोग धरने पर बैठे रहे। समाज के लोगों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।