राष्ट्रमत न्यूज,मिर्जापुर(ब्यूरो)। आदमी सोच बदले तो वह जंगल में भी कैफै खोल सकता है।नेशलन हाइवे में तो कुछ भी हो सकता है। हम सबने नेशनल हाइवे के किनारे अक्सर ढाबा देखा गया है।अनुज कुमार सिंह की यह नई सोच ही थी कि उन्होंने नेशलन हाइवे के किनारे कैफै खोलने का मन बनाया। मिर्जापुर से राबर्टगंज की ओर जाने वाले रास्ते आरसीसी कैफै है। पहली नजर में देखकर हैरानी हुई। इसलिए कि बाहर का लुक ढाबे से अलग था। कैफे के बाहर बढ़ी बढ़ी होर्डिग लगी है। काॅलेज के छात्रों की बाइकें खड़ी दिख जाती हैं। नेशनल हाइवे से गुजरने वालों की कारें भी इस कैफे के बाहर होती हैं। इस कैफै की खासियत यह है कि यह बीएचयू साउथ कैम्पस के ठीक सामने है। और इस कैफे में आप से चाय,काफी का पैसा नहीं लिया जाता।

खाने का स्वाद ताज होटल सा
कैफे के मैनेजर राहुल यादव बताते हैं कि बीएचयू कैम्पस में करीब साढे चार हजार विद्यार्थी हैं। लेकिन उन्हें यह फील हुआ कि ढाबे में खाने का वैसा स्वाद नहीं है जो वो चाहते हैं। इसलिए कैफे में उनकी पंसद को ध्यान में रखते हुए बाहर से तीन सैफ बुलाए गए। एक बंगाल का है और दो लखनऊ के हैं। यहां खाने का स्वाद आपको ताज होटल जैसा मिलेगा। 31 दिसम्बर 2025 में कैफे आरसीसी यानी राजपूताना काफी कैफे खोला गया। बहुत कम समय में यह कैफे लोकप्रिय हो गया है। उसकी वजह केवल बीएचयू के छात्र-छात्राएं ही नहीं है बल्कि अंगुतुकों के स्वादपसंद का भी हमने ध्यान रखा।

दूर तक ऐसा कैफे नहीं
आरसीसी कैफे की खासियत यह है कि अंदर स्पेस बढ़िया है। लाइट है। म्यूजिक सिस्टम है। मंच है। अंदर अकार्षक सजावट है। शांति है। किसी का मन करे तो स्टेज पर गा सकता है। गिटार बजा सकता है। माइक है। यानी आर्केस्ट्रा का लुत्फ भी उठा सकते हैं। आप में प्रतिभा है और गाने का शौक रखते हैं या फिर म्यूजिक का तो खाने के स्वाद के साथ अपना ख्वाहिश को मुकम्मल भी कर सकते हैं। शनिवार और रविवार को बीएचयू के विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो जाती है। छात्र-छात्राएं गाते-बाजते दिख जाते हैं।

पहली बार हैरानी होगी
नेशलन हाइवे के किनारे आरसीसी कैफे देखकर किसी को भी हैरानी हो सकती है। इस कैफे के प्रोपाटर अनुज कुमार सिंह जो बनारस के हैं, कहते हैं हमने महसूस किया कि बीएचयू के विद्यार्थी कुछ अलग चीज स्वाद में चाहते हैं। ढाबे का स्वाद अलग होता है। कल्चर भी अलग ही होता है। इसलिए हमने अपने इस कैफे में इंगलिस कल्चर और देसी कच्चर को मिक्स किया। उसका हमें रिस्पांस भी मिला। अब इस कैफै में दूर के यात्री यहां रूक कर चाय या फिर काॅफी पीना पसंद करते हैं। लेकिन इस कैफे में चाय- काफी का पैसा अगंतुकों से नहीं लिया जाता। सभी के लिए फ्री है। अन्य चीजों का बिल पे करना पड़ता है। चाय और काॅफी मन सुकून देने वाली ही मिलती है।

हर कोई कुछ अलग चाहता है
मिर्जापुर से कभी गुजरें तो एक बार आरसीसी कैफै जरूर जाएं और खुद महसूस करें कि यह कैफे अलहदा क्यों है? इससंे इंकार नहीं है कि आज का युग हाइटेक है। हर कोई कुछ अलग चाहता है। अलग लुत्फ चाहता है। अलग पसंद और स्वाद भी। अनुज कुमार सिंह की राजपूताना काफी कैफे बनारस में भी है।उनकी इच्छा है देश के कई नेशनल हाइवे के किनारे आरसीसी कैफै खोलूं। और लोगों को केवल खुशी ही नहीं बल्कि हैरान भी करूं।