राष्ट्रमत न्यूज,इंदौर(ब्यूरो)। इंदौर के भागीरथपुरा में बोरिंग के पानी में फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया मिला है। यह हैजा, टाइफॉइड और हेपेटाइटिस-ए जैसी बीमारियों की वजह बन सकता है। यहां से लिए गए पानी के 60 में से 35 सैंपल फेल हो गए हैं। वार्ड के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला का बोरिंग भी दूषित पाया गया है। इधर, इंदौर के भागीरथपुरा में उल्टी.दस्त का कहर जारी 23 नए मरीजों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता।

446 मरीजों को भर्ती करना पड़ा
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण बीमार होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक यहां से 3300 से अधिक मरीज मिल चुके हैं। गुरुवार को उल्टी-दस्त की शिकायत के साथ 23 नए मरीज मिले हैं, इनमें से छह मरीजों को अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग से मिल जानकारी अनुसार अब तक कुल 446 मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी है।
396 मरीज स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज
इनमें से 396 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया है, वहीं 50 मरीज अभी भी भर्ती हैं। अभी आईसीयू में 10 मरीज भर्ती हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गुरुवार को 1750 घरों में किट प्रदान की गई, जिसमें लगभग 6245 सदस्य लाभांवित हुए।

18 मरीज को डायरिया की शिकायत
इधर, बुधवार को भागीरथपुरा चौकी के पास बनी टंकी का वॉल खोला गया। इस दौरान सभी हैरान रह गए। दरअसल, दो दिन पहले जहां ड्रेनेज लाइन का पाइप डाला गया था, वहीं से पानी बाहर आने लगा। कुछ ही देर में ड्रेनेज लाइन के लिए खोदे गए गड्ढे में भी पानी भर गया।भागीरथपुरा में इतनी मौतों के बाद लोगों ने बोरिंग का यूज बंद कर दिया है। रहवासी टैंकरों और आरओ के पानी पर निर्भर हैं। बुधवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में 18 मरीज डायरिया की शिकायत लेकर पहुंचे थे। इनमें से 6 को रेफर किया है।
क्षेत्र में मुनादी कराई जा चुकी थी
हालांकि, नर्मदा लाइन से आ रहे पानी के इस्तेमाल को लेकर पहले ही क्षेत्र में मुनादी कराई जा चुकी थी। लोगों को साफ तौर पर इस पानी का उपयोग न करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रक्रिया आगे भी कुछ समय तक जारी रहेगी, जिससे नर्मदा लाइन से दूषित पानी पूरी तरह बाहर निकाला जा सके।