77 लाख के दस नक्सलियों का रेड काॅरीडोर से मोह भंग - rashtrmat.com

77 लाख के दस नक्सलियों का रेड काॅरीडोर से मोह भंग

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला 35 सालों से लाल आतंक का दंश झेल रहा है। जो  खत्म होने के कगार पर है। 06 दिसंबर की रात को मध्य प्रदेश के सियासी इतिहास में पहली बार MMC जोन के KB डिवीजन कान्हा भोरमदेव के 10 नक्सलियों ने सरेंडर किया। जिसमें 77 लाख रुपए के इनामी माओवादियों में 62 लाख का इनाम नक्सली कबीर है। चार महिलाएं और 6 पुरुष नक्सलियों का लाल गलियारे से तौबा किया।


पुनर्वास नीति रंग लाई
केंद्र सरकार के नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने की डेडलाइन मार्च 2026 तय की गई है। जिसके बाद से सुरक्षाबलों की कार्रवाई तेज हो गई। नतीजतन बालाघाट में या तो नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ या फिर उन्होंने सरेंडर किया। छह दिसंबर को भी 10 केबी डिवीजन के 10 नक्सलियों ने सीएम के सामने हथियार डाले और सविंधान की किताब थामकर मुख्य धारा से जुड़ने का निर्णय लिया। निश्चित ही मप्र सरकार की पुर्नावास नीति और पुलिस जवानों के अथक प्रयासों का परिणाम था।
फारेस्ट गार्ड की मदद से किया सरेंडर
इन 10 नक्सलियों के सरेण्डर कराने के पीछे मुख्य भूमिका फसरेस्ट कर्मचारी गुलाबसिंह धुर्वे की रही। वो स्वंय नक्सलियांे को लेकर बालाघाट पहुंचे थे। उन्होंने हसक फोर्स के जवानों से संपर्क किया। फिर उन्हें रात के करीब 11 बजे बालाघाट रेंज के आईजी के बंगले पहुंचाया गया। इसके बाद सभी नक्सलियों को पुलिस लाइन लाया गया और कागजी कार्यवाही शुरू की गई।


62 लाख का इनामी है कबीर
केबी डिवीजन का प्रमुख कबीर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। जो एमएमसी जोन का मोस्ट वांटेड था। जिसके कांडो पर केबी डिवीजन और जीआरबी डिवीजन को संभालने की जिम्मेंदारी थी। जो अपने कांधो पर एके 47 लेकर चलता था। जिसके उपर कुल 62 लाख का ईनाम घोषित था। इसके अलावा नक्सली राकेश ओडी उर्फ मनीष भी एसजेडीसीएम रैंक का नक्सल कैडर था। जो एके 47 लेकर चलता था। इसके उपर भी कुल 62 लाख का ईनाम घोषित था। वही अन्य सभी नक्सली नवीनए समर उर्फ राजू आत्राम, लालसू, शिल्पा, जयशीला, जरीना, सोनी, जानकी, विक्रम एसीएम रैंक के नक्सली के उपर 14-14 लाख का ईनाम घोषित था। 07 दिसंबर को पुलिस लाईन परिसर में कार्यक्रम के तहत हुआ नक्सलियों का यह सरेण्डर मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा सरेंडर थाए जिसमें सीएम मोहन यादव उपस्थित हुए थे।


दो दर्जन नक्सलिसों ने किया सरेंण्डर
साल के अंत में पहली शुरूआत महिला माओवादी सुनीता से हुई और अब तक की स्थिति में कबीर समेत 10 नक्सलियों ने किया। आगे भी कुछ नक्सलियों के सरेण्डर किये जाने की संभावना है। विशेष बात यह है कि मप्र सरकार की सरेण्डर नीति को कारगर साबित करने के लिये इस साल सुरक्षाबलों ने बालाघाट में सबसे अधिक ज्यादा एंटी नक्सल आॅपरेशन चलाए है। जिसका परिणाम ये रहा कि एमएमसी जोन के 8 नक्सली मारे गए और दो दर्जन से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है।


नक्सली समय से पहले सरेंडर करें
CM मोहन यादव ने कहा कि हाकफोर्स और पूरे नक्सल विरोधी अभियान की सफलता का आज बहुत बड़ा दिन है। मार्च 2026 जनवरी तक हर हालत में या तो नक्सलवादी सरेण्डर करें या उनको हम मैदान से ही समाप्त करेंगे। इस अभियान में 1 नवंबर को एक बड़ी नक्सली नेता सुनीता ने सरेण्डर किया था, जिस पर 17 लाख का इनाम था। उसके बाद आज मध्य प्रदेश के इतिहास का यह सबसे बड़ा सरेण्डर है कि यहां 10 सदस्यों ने सरेण्डर किया है। यह हमारे दबावपूर्ण कार्रवाई के कारण ही है कि नक्सलियों ने अपने आप को सरेंडर किया है। मध्यप्रदेश में अभी भी बचे हुए जो नक्सली हैं उनके लिये मैं अपील करूंगा कि आओ सरेण्डर करो हम सब पुनर्वास की नीति के माध्यम से उनके जीवन की भी गारंटी लेंगे। लेकिन यह समय सीमा में हो। हमारा सबका संकल्प है कि हर हालत में हमारी धरती से नक्सलवाद का खत्मा हो।
जल्द अच्छे परिणाम आएंगे
दो साल से चले हुए अभियानों में डिंडोरी मंडला तो पूर्णत नक्सलवादी गतिविधियों से मुक्त हो गया है। अब हमारा यह बालाघाट का करीब पूरा हिस्सा नक्सल मुक्त हुआ है। उम्मीद करेंगे कि आगे भी जल्दी अच्छे परिणाम आएंगे।