राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।भारतीय भाषाओं और साहित्यकारों के लिए कार्यरत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समवैचारिक संगठन अखिल भारतीय साहित्य परिषद का त्रिवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन इस वर्ष 7, 8 एवं 9 नवंबर 2025 को रीवा में आयोजित किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह महाअधिवेशन कृष्णा राजकपूर ऑडिटोरियम रीवा में संपन्न होगा। जिसमें देशभर से विभिन्न भाषाओं एवं बोलियों के 1000 से अधिक साहित्यकार एवं प्रतिनिधि भाग लेंगे।

अधिवेशन में पूर्व राष्ट्रपति आयेंगे
परिषद के प्रांत महामंत्री एवं अधिवेशन संयोजक चंद्रकांत तिवारी ने बताया कि यह रीवा के लिए ऐतिहासिक अवसर है, क्योंकि किसी भी संगठन का अखिल भारतीय स्तर का यह पहला अधिवेशन रीवा में आयोजित हो रहा है।7 नवंबर को दोपहर 2.30 बजे अधिवेशन का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति माननीय रामनाथ कोविंद के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ सुशील चंद्र त्रिवेदी मधुपेश करेंगे। उद्घाटन सत्र के उद्घाटनकर्ता मराठी के प्रख्यात उपन्यासकार एवं चिंतक विश्वास महीपति पाटिल होंगे।
रहने की व्यवस्था
तीन दिवसीय इस अधिवेशन में मातृशक्ति, युवा एवं वरिष्ठ साहित्यकारों का विशेष प्रतिनिधित्व रहेगा। साहित्य परिषद के कार्यकर्ताओं ने प्रतिनिधियों के लिए सरस्वती जेल मार्ग, सरस्वती निराला नगर सहित अन्य संस्थानों एवं निजी होटलों में आवास व्यवस्था सुनिश्चित की है। वहीं आवास स्थल से कार्यक्रम स्थल तक प्रतिनिधियों के आवागमन के लिए यातायात समिति द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

17 समितियां गठित
कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु 17 से अधिक समितियां गठित की गई हैं। जिनमें रीवा नगर के अनुभवी एवं ऊर्जावान कार्यकर्ता तथा युवाओं की टोली सक्रिय भूमिका निभा रही है।अखिल भारतीय साहित्य परिषद की स्थापना 27 अक्टूबर 1966 को राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं मानवीय मूल्यों के आधार पर साहित्यिक मंच के रूप में की गई थी। इसके पहले अध्यक्ष प्रख्यात उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार थे। परिषद का उद्देश्य भारतीय दृष्टिकोण से साहित्य के माध्यम से देश की एकता, मानवीय संवेदना एवं सांस्कृतिक गौरव को स्थापित करना है।यह अधिवेशन न केवल रीवा के साहित्यिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा, बल्कि संपूर्ण भारत की भाषाई और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रतीक भी बनेगा।