पहाड़ काटकर बनी सड़क, नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलेगी जीवन की दिशा - rashtrmat.com

पहाड़ काटकर बनी सड़क, नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बदलेगी जीवन की दिशा

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। किसी भी क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए पक्की सड़क की भूमिका आधारशिला के समान होती है। विशेषकर दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जब सड़क पहुंचती है, तो विकास अपने आप गति पकड़ लेता है। ऐसा ही परिवर्तन अब बालाघाट जिले के किरनापुर विकासखंड अंतर्गत जनजातीय बहुल ग्राम कसंगी और गोदरी के बीच देखने को मिल रहा है, जहां वर्षों की कठिनाइयों को पार करते हुए पक्की सड़क निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है।

निर्माण किसी चुनौती से कम नहीं था

घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरे इस क्षेत्र में सड़क निर्माण किसी चुनौती से कम नहीं था। कसंगी से गोदरी तक लगभग 4 किलोमीटर 620 मीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में सबसे कठिन कार्य कुआंगोदी से भगतपुर के बीच पहाड़ और चट्टानों की कटिंग कर रास्ता तैयार करना रहा। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, इकाई क्रमांक-2 द्वारा आधुनिक मशीनों और तकनीकों का उपयोग कर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया।

RCPLWE योजना से मिली सौगात

मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, इकाई क्रमांक-2 की महाप्रबंधक श्रीमती माया मनीष परते ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आरसीपीएलडब्ल्यूई योजना के अंतर्गत वर्ष 2023 में इस सड़क के निर्माण के लिए 5 करोड़ 97 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। चूंकि सड़क घने वन क्षेत्र से होकर गुजरती है, इसलिए वन विभाग से अनुमति प्राप्त करने में समय लगा। अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया।

डामरीकरण कार्य भी पूर्ण

कुआंगोदी और भगतपुर के बीच पहाड़ की कटिंग में लगभग एक वर्ष का समय लगा। इसके बाद सड़क निर्माण कार्य को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया। वर्तमान में जीएसबी एवं गिट्टी का कार्य पूर्ण कर सड़क को हल्के चार पहिया वाहनों के आवागमन के लिए उपयुक्त बना दिया गया है। मार्च 2026 तक सड़क का डामरीकरण कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा।

दूरी घटकर  55किलोमीटर रह जाएगी

अब तक कसंगी और आसपास के गांवों के ग्रामीणों को किरनापुर पहुंचने के लिए मोहनपुर, चालीसबोड़ी, कावेली, बंजारी होते हुए बालाघाट होकर लगभग 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी। लेकिन इस सड़क के बन जाने से ग्रामीण अब कुआंगोदी से घाट उतरकर भगतपुर और गोदरी होते हुए सीधे किरनापुर पहुंच सकेंगे, जिससे दूरी घटकर लगभग 55 किलोमीटर रह जाएगी। इसी प्रकार किरनापुर के लोगों को बैहर जाने के लिए अब बालाघाट नहीं आना पड़ेगा। वे गोदरी, भगतपुर, कुआंगोदी, कसंगी और मोहनपुर होते हुए सीधे बालाघाट–बैहर मार्ग से बैहर पहुंच सकेंगे। इससे समय, ईंधन और खर्च—तीनों की बचत होगी।

विश्वास की नई कहानी

इस सड़क के बनने से जनजातीय बहुल ग्राम कसंगी और कुआंगोदी के ग्रामीणों के लिए अपनी वनोपज हर्रा, बहेड़ा, गोंद, चिरौंजी, शहद सहित अन्य कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाना आसान हो गया है। सड़क बनने से यहां के ग्रामीण अपनी उपज आसानी से चालीसबोड़ी बाजार तक लाने लगे है। पहले बड़े वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते थे, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। घने जंगलों से होकर गुजरने वाली यह सड़क क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा देगी। वर्षों तक सड़क के अभाव में लोग इन गांवों में रिश्ते करने से कतराते थे, लेकिन अब यह सड़क केवल गांवों को नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का काम करेगी। कुल मिलाकर कसंगी से गोदरी तक बन रही यह सड़क न सिर्फ विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है, बल्कि दुर्गम अंचल में आशा, अवसर और विश्वास की नई कहानी भी लिख रही है।