राष्ट्रमत न्यूज,बीजापुर(ब्यूरो)। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) में शौचालय निर्माण से लेकर भुगतान में घोटालों की खबरों के बीच एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इसके तहत एक अधिकारी को उसकी नौकरी से हटाने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रचा गया। यह खुलासा हुआ है एक व्हाट्सएप चैट से है।

अनियमिताएं उजागर
पिछले कुछ समय से बीजापुर जिले में स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत अधूरे शौचालय निर्माण, खराब सोखता गड्ढे, सेप्टेज शेड निर्माण में लापरवाही और स्व सहायता समूह के सदस्यों को दो साल से मानदेय न मिलने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इन्हीं शिकायतों के बीच अब अधिकारियों के बीच हुई एक गोपनीय बातचीत ने योजना में चल रहे गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया है।।
सेवाएं समाप्त कर दी गईं
मामला बीजापुर जिले का है, जहां स्वच्छ भारत मिशन में रंजीत सिंह नाम के एक अधिकारी पदस्थ थे। खबरों के मुताबिक, रंजीत सिंह की भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए और कुछ लोगों ने शपथ पत्र देकर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया। इसका मकसद रंजीत सिंह को हटाकर किसी दूसरे व्यक्ति को लाभ पहुंचाना था। आखिरकार, रंजीत सिंह को बीजापुर से स्थानांतरित कर दिया गया या उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

व्हाट्सएप चैट से राज बाहर आया
इस पूरे प्रकरण में षड्यंत्र का सबूत एक व्हाट्सएप चैट में मिलता है। यह चैट अमृत दास साहु और पुष्पा गांधरला नामक दो व्यक्तियों के बीच हुई है, जो स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े प्रतीत होते हैं।
चैट इस प्रकार है:
· अमृत दास साहु (09 फरवरी, 2020): “आगे क्या करना है?”
· पुष्पा गांधरला: “आप बताएं सर।”
· अमृत दास साहु: “आपको क्या लगता है क्या करना चाहिए?”
· पुष्पा गांधरला: “कुछ ऐसा कि रंजीत बीजापुर से ही चला जाए।”
· अमृत दास साहु: “सुबह मिलकर बात करते हैं इस संबंध में।”
क्या था जिसे छुपाया जा रहा है
यह संक्षिप्त चैट साफ इशारा करती है कि रंजीत सिंह को बीजापुर से हटाने के लिए एक योजना बनाई जा रही थी।
इस चैट की पुष्टि और पड़ताल करने के लिए जब अमृत दास साहु से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इससे सवाल और गहरा गया है कि आखिर ऐसा क्या था जिसे छुपाया जा रहा है।यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या किसी योग्य अधिकारी को सिर्फ षड्यंत्र के तहत हटाया गया? क्या यह स्वच्छ भारत मिशन में व्याप्त एक बड़े घोटाले का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है?
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी
जिले में स्वच्छ भारत मिशन के शौचालय निर्माण में गड़बड़ी, जीओ-ट्रैकिंग में अनियमितता और वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के मामले लगातार उजागर हो रहे हैं। इस घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना के कुछ अधिकारी और कर्मचारी मिलकर सिस्टम पर सेंध लगा रहे हैं, जिससे सरकार के सारे आंकड़े और दावे खोखले साबित हो रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन जैसी एक महत्वाकांक्षी योजना में ऐसे घोटाले और षड्यंत्र न सिर्फ सरकारी खजाने के साथ खिलवाड़ हैं, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ भी धोखा है। प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह इस पूरे मामले की गहन जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।