स्कूल भवन हैं जर्जर,आंगनबाडी और किराये के भवन में चल रहें हैं स्कूल - rashtrmat.com

स्कूल भवन हैं जर्जर,आंगनबाडी और किराये के भवन में चल रहें हैं स्कूल

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। राज्य सरकार द्वारा जिला प्रशासन की मांग पर हाल ही में जिले के जर्जर हो चुके शासकीय विद्यालयों के मरम्मत एवं रखरखाव के लिए राशि आवंटित की गई है। इस स्वीकृति में बैहर,परसवाड़ा और बिरसा विकासखंड के कई गांवों की प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाएं शामिल की गई हैं। बावजूद इसके अब भी अनेक गांव ऐसे हैं जहां के जर्जर विद्यालय मरम्मत राशि से वंचित हैं। जिससे स्थानीय स्तर पर असंतोष व्याप्त है।


अब भी कई जर्जर स्कूल हैं
ग्रामीण लगातार शिकायत करते आए हैं और विद्यालयों के प्रभारी शिक्षकों ने भी डीपीसीए जनपद पंचायत,जिला पंचायत एवं जिला प्रशासन को भवनों की दयनीय स्थिति से अवगत कराया है। बावजूद इसके कोई ठोस पहल नहीं की गयी। इतना ही नहीं विद्यांजलि योजना के अंतर्गत भी इन विद्यालयों की मरम्मत नहीं कराई गई। जिससे समस्या और गंभीर हो गई है। स्थिति यह है कि कई विद्यालयों के भवन अत्यधिक जर्जर हो जाने के कारण वहां अध्ययन कार्य संचालित करना जोखिम पूर्ण हो गया है।
आंगनबाड़ी में लग रही है स्कूल
बैहर जनपद के लातरी ग्राम के हर्राटोला एवं बैगाटोला प्राथमिक शाला तथा समीपस्थ पंचायत नव्ही के बैगा बाहुल्य ग्राम भरेवाटोला का प्राथमिक विद्यालय इसका प्रमुख उदाहरण हैं। इन स्कूलों में भवन जर्जर होने से शिक्षक बच्चों को पास स्थित आंगनवाड़ी भवनों में पढ़ाने को मजबूर हैं। विगत दिनों राष्ट्रमत टीम ने प्रभावित गांवों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों ने भवनों की जर्जर स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए शीघ्र मरम्मत की मांग की। इसी प्रकार जिले में कई अन्य विद्यालय भी हैं जो आंगनवाड़ी या किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं।


जर्जर स्कूलों का सर्वे हो
शिक्षकों का कहना है कि अस्थायी व्यवस्था के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है वहीं बारिश के मौसम में खतरा और भी बढ़ जाता है। इसी तरह जिले में और भी कई स्कूल हैं जो जर्जर स्थिति के कारण या तो आंगनवाड़ी भवनों में अथवा किराए के कमरों में संचालित हो रहे हैं। बहरहाल ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी जर्जर स्कूल भवनों का सर्वे कर शीघ्र मरम्मत राशि स्वीकृत की जाए ताकि बच्चों को सुरक्षित और अनुकूल वातावरण में शिक्षा मिल सके।