राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट (ब्यूरो)। जिले में इथेनॉल प्लांट की आड़ में शासकीय चावल का गोरखघंधा धड़ल्ले से जारी है। चावल छिंदवाड़ा की बजाए महाराष्ट्र भेजा जा रहा है। सुनियोजित तरीके से यह गोरख धंधा इस बात का इशारा करता है कि परिवहनकर्ता से लेकर जिम्मेदारों का इसमें हाथ है। उनकीं भूमिका संदेह के घेरे में है।

तीन ट्रक चावल जब्त
लालबर्रा स्थित वेयर हाउस से छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित इथेनॉल प्लांट के लिए चार ट्रक शासकीय चावल लेकर रवाना हुए थे। प्रत्येक ट्रक में लगभग 24 टन सरकारी चावल लदा था। नियमों के मुताबिक ट्रकों को निर्धारित मार्ग से छिंदवाड़ा जाना था। लेकिन तीन ट्रक छिंदवाड़ा मार्ग छोड़कर महाराष्ट्र के गोंदिया की ओर बढ़ रहे थे। मामले की भनक लगते ही एसडीएम के निर्देश पर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तीन ट्रकों को रास्ते में ही जब्त कर लिया। हालांकि चौथा ट्रक प्रशासनिक निगरानी से बच कर निकला गया।बोरगांव की ओर रवाना हो गया। अब सवाल खड़ा यह होता है कि आखिर प्रशासन की सख्ती चुनिंदा ट्रकों तक ही क्यों सीमित है।
ट्रक गोंदिया की ओर क्यों गया
ट्रक चालकों के बयान भी पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहे हैं। गोंदिया निवासी चालक रोशन पंद्रे ने बताया कि खैरी के अर्जुनी तक ट्रक लाया जाना था, जहां से दूसरा चालक जिम्मेदारी संभालता। बड़ा सवाल यह है कि जब चालक को रास्ते की जानकारी नहीं थी तो उसे इतने संवेदनशील सरकारी माल के परिवहन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई।और अगर बोरगांव जाना था, तो गोंदिया की ओर मोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?
चावल की अफरातफरी करने वाले कौन
ट्रक चालकों के अनुसार वाहन गोंदिया निवासी किसी बंटी भाई का है। जिससे अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका और गहरी हो जाती है। पूरे प्रकरण में चावल परिवहनकर्ता वेयर हाउस प्रबंधन और एफसीआई से जुड़े अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध प्रतीत हो रही है। इस गंभीर मामले पर अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल ट्रक चालकों तक सीमित रहेगा या शासकीय चावल की इस अफरातफरी के असली सूत्रधारों तक कार्रवाई पहुंचेगी।