राष्ट्रमत न्यूज,नई दिल्ली(ब्यूरो)। संसद में अमेरिका से हुए ट्रेड डील को लेकर गंभीर सवाल उठाने के बाद सरकार और भाजपा की ओर से अपने उपर हो रहे भारी चौतरफा हमलों के बावजूद लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस डील में किसानों और देश के हितों की बलि चढ़ाए जाने के अपने आरोपों को दुहराया है लोकसभा की उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए भाजपा सदस्य की ओर से दिए गए प्रस्ताव के बाद गुरूवार को राहुल गांधी ने सत्तापक्ष को जवाबी चुनौती देते हुए कहा चाहे उन्हें गाली दी जाए, एफआईआर हो, विशेषाधिकार हनना प्रस्ताव लाएं, कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि संसद में ट्रेड डील पर उन्होंने सच्चाई बोली है।
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लाइफटाइम बैन लगाने की मांग
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा में सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। उन्होंने राहुल पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया है। दुबे ने राहुल की संसद सदस्यता खत्म करने और चुनाव लड़ने पर लाइफटाइम बैन लगाने की मांग की है।
सोरोस फाउंडेशन व देश को टुकड़े करने वाले ताक़तों के साथ मिलकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी भारत का विभाजन करना चाहते हैं। मैंने लोकसभा के नियम 352(5) और नियम 353 के तहत उनकी सदस्यता रद्द करने व भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने की पाबंदी का मोशन पेश किया।
मैं किसानों के लिए लड़ूंगा
इसके जवाब में राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर वीडियो के साथ पोस्ट कर कहा- FIR हो, मुकदमा दर्ज हो या प्रिविलेज प्रस्ताव लाएं। मैं किसानों के लिए लड़ूंगा। जो भी ट्रेड डील किसानों की रोजी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है। अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।

यह वीडियो 4 फरवरी को ओम बिरला के चैंबर में किए गए हंगामे का है। जिसमें पक्ष-विपक्ष के सांसद नजर आ रहे हैं।
डील से देश की खाद्य सुरक्षा कमजोर होगी
प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए नेता विपक्ष ने कहा कि पहले अपने अरबपति मित्रों के मुनाफे के लिए काले कानून लाए थे, अब अपने गले से अमेरिकी शिकंजा हटाने के लिए ट्रंप के अमेरिका के लिए भारतीय खेती के दरवाजे खोल दिए हैं और कल इन्हीं सब मित्रों के लिए यही दरवाजे और भी चौड़े किए जाएंगे।
किसानों की रोजी-रोटी पर हमला
समझौते पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि इस डील में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर नॉन टैरिफ बैरियर’ हटाने की बात की गई है और यह विदेशी कृषि उत्पादों के लिए भारतीय बाजार का खोलना है जो भारत की खाद्य सुरक्षा और किसानों की रोजी-रोटी पर सीधा हमला है।
