डिप्टी CM के जिले में छात्राओं के अंदर हाथ डालता है प्रिंसिपल - rashtrmat.com

डिप्टी CM के जिले में छात्राओं के अंदर हाथ डालता है प्रिंसिपल

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)।मध्यप्रदेश का रीवा जिला जो कि डिप्टी CM राजेन्द्र शुक्ला का है। इनके जिले में हैरान करने और कानून का तियां पांचा निकालने वाले अपराध के बीच एक हैरान करने वाला अपराध सामने आया है। नाबालिग छात्राओं के साथ शासकीय कन्या हाई स्कूल गंगेव का प्रिंसिपल सुभाष चंद्र त्रिपाठी पर अशोभनीय हरकतें करने और उनके साथ अभद्रता से पेश आने का आरोप लगा है। आरोप है कि वे छात्राओं के साथ अश्लील छेड़छाड़ के अलावा उनके कपड़े के अंदर हाथ डालते है। प्रिंसिपल ऐसी शोभनीय हरकतें पिछले दो साल से करते आ रहे हैं।नाबालिग छात्राओं के इस आरोप की गूंज भोपाल के प्रशासनिक गलियारों तक होने से हड़कंप है।


भीतर हाथ डालते हैं
विद्यालय के प्रिंसिपल सुभाष चंद्र त्रिपाठी पर छात्रावास में रहने वाली नाबालिग बालिकाओं ने बेहद गंभीर और शर्मनाक आरोप लगाए हैं। आरोप इतने घिनौने हैं कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ नारे की बखिया उघर गयी है।पीड़ित छात्राओं का कहना है कि प्रिंसिपल द्वारा अश्लील और गंदी बातें पिछले दो साल से की जा रहीं थीं। गलत और भयावह नजरों से देखा जाता था। शरीर के संवेदनशील अंगों को छूने जैसी हरकतें की जाती थीं छात्राओं का दावा है कि यह सब एक बार नहीं बल्कि बार.बार हुआ। डर और दबाव के कारण वे लंबे समय तक चुप रहीं।
सभी बच्चियों का एक ही आरोप
जब अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में बदलाव दिखा तो वे छात्रावास पहुंचे। एक.एक कर जब बालिकाओं से पूछा गया तो लगभग सभी ने एक ही कहानी सुनाई। यहीं से यह मामला आग की तरह फैल गया। एक छात्रा की मां नीतू ने कहा कि मेरी बच्ची ने जब यह बात बताई तब मुझे पता चला कि छात्रावास में क्या हो रहा है। प्रिंसिपल सुभाष त्रिपाठी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिएं हम लोग भरोसे से अपने बच्चों को यहां पढ़ने के लिए भेज हैं है कि यहां सेफ रहेंगी।मेरी बच्ची ही नहीं कइयों की यह शिकायत है।


’वार्डन की भूमिका पर भी सवाल’
छात्रावास की वार्डन ने यह स्वीकार किया है कि पहले भी एक बार शिकायत मिलने पर प्रिंसिपल को मौखिक चेतावनी दी गई थी। जब शिकायत पहले ही सामने आ चुकी थी तो कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। किसके संरक्षण में आरोपी बेखौफ बना रहा। वार्डन ने महिला पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की। यहा फिर उच्च अधिकारियों से शिकायत क्यों नहीं की।
’पैसों से मामला दबाने की कोशिश
अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो पैसों के जरिए मामला रफा.दफा करने की कोशिश की गई। अगर यह आरोप सही साबित होता है तो यह सिर्फ अनैतिक नहीं बल्कि सीधा.सीधा कानून को चुनौती है।’सबसे बड़ा सवाल यह है कि बेटियां सुरक्षित छात्रावास में भी क्यों नहीं हैं? आज समाज के सामने कुछ बेहद कड़वे सवाल खड़े है।अगर स्कूल का प्रिंसिपल ही आरोपी हो तो सुरक्षा कौन देगा? क्या माता.पिता बच्चों को स्कूल इसीलिए भेजते हैं क्या शिक्षा के मंदिर अब डर और शोषण के केंद्र बनते जा रहे हैं।


जांच करा रहे हैं-सौरभ
इस मामले पर प्रभारी कलेक्टर सौरभ सोनवड़े ने कहा कि यह गंभीर मामला है। मेरे पास आज ही संज्ञान में आया है। हम तत्काल जांच बिठा रहे हैं। बारीकी से जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर मामले में तत्काल वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।’क्षेत्र में आक्रोश चरम पर है।अभिभावकों और स्थानीय लोगों की साफ मांग है आरोपी प्रिंसिपल को तत्काल निलंबित किया जाए इस पर प्रभारी कलेक्टर ने कहा मामले की जांच करा रहे हैं। उससे पहले कोई भी एक्शन लेना केवल आरोप पर जायज नहीं है।