सांइस काॅलेज में कैंसर,अस्थमा,नपुंसकता दूर करने वाला पौधा मिला - rashtrmat.com

सांइस काॅलेज में कैंसर,अस्थमा,नपुंसकता दूर करने वाला पौधा मिला

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। शासकीय माडल साइंस कालेज रीवा के परिसर में जैव विविधता से संबंधित एक महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। कालेज परिसर में टेलिलिया कंद का पौधा मिला। यह पौधा कैंसर,नपुसंकता और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में काम आता है।
वनस्पति विभाग को भेजा गया
टेलिलिया कंद का पौध अन्य पौधों से अलग किस्म का था। इसकी पहचान के लिए महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग को भेजा गया। जहाँ विभाग के विशेषज्ञ डाॅ संतोष अग्निहोत्री एवं डाॅ अनूप सिंह बघेल ने इसकी जांच कर इसे टेलिलिया कंद के रूप में प्रमाणित किया।

हिमालय की पहाड़ियों में मिलता है

वैज्ञानिक नाम  Sauroumatum venosum  से ज्ञात यह पौधा एरेसी कुल का सदस्य है और अत्यंत दुर्लभ एवं चमत्कारिक गुणों वाला औषधीय पौधा माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार टेलिलिया कंद के पत्ते देखने में सूरन के समान प्रतीत होते हैं, किंतु इसकी पत्तियाँ अधिक मुलायम, चमकदार एवं भूमि की ओर झुकी हुई दिखाई देती हैं। इसके कंद में मौजूद तेल ग्रंथियों से लगातार तेल जैसा द्रव्य रिसता रहता है, जिसके कारण आसपास की मिट्टी काली दिखाई पड़ती है। इस प्रजाति का पौधा अत्यधिक दुर्लभ माना जाता है और सामान्यतः हिमालय एवं गिरनार की पहाड़ियों में 900 से 2500 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है। मैदानी क्षेत्र में इसका पाया जाना अत्यंत विशेष और अध्ययनयोग्य घटना है।
औषधियों के निर्माण में
इतिहास और परंपराओं में इस पौधे का उल्लेख अत्यंत रोचक रूप में मिलता है। प्राचीन समय में इसका उपयोग पारा (Mercury) और तांबे (Copper) से सोना बनाने की प्राचीन रसायन विद्या, तांत्रिक साधनाओं तथा विभिन्न ताबीजों की तैयारी में किया जाता था। आयुर्वेद में इस कंद का प्रयोग नपुंसकता, शक्ति-वर्धन, अस्थमा, कैंसर और बुढ़ापा रोकने से संबंधित औषधियों के निर्माण में किया जाता रहा है।