NGT के आदेश पर तहसील कार्यालय ने नपा को थमाया17.67 करोड़ का नोटिस - rashtrmat.com

NGT के आदेश पर तहसील कार्यालय ने नपा को थमाया17.67 करोड़ का नोटिस

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। बालाघाट नगरपालिका को तहसील कार्यालय की ओर से 17.67 करोड़ रुपए की पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूली का नोटिस जारी किया गया है। यह नोटिस राष्ट्रीय हरित अधिकरण एनजीटी के आदेश के तहत मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सिफारिश पर दिया गया है। नगरपालिका को नोटिस का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।


जल गुणवत्ता खतरनाक
एनजीटी के आदेश के अनुसार बालाघाट शहर के प्रमुख तालाब लंबे समय से प्रदूषण की चपेट में हैं। घरेलू सीवेज ठोस कचरे और अनुपचारित अपशिष्ट के सीधे तालाबों में गिरने से जल गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक गिर चुकी है। इसके बावजूद नगरपालिका न तो प्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित कर सका और न ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट एसटीपी की दिशा में सार्थक पहल किया।
एनजीटी का सख्त फैसला
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2016 में ही कचरा प्रबंधन और सीवरेज ट्रीटमेंट को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए थे। इन आदेशों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और जल प्रदूषण रोकथाम के लिए समयबद्ध कार्य योजना लागू करने को कहा गया था। लेकिन लगभग 09 वर्षों तक इन आदेशों को कागजों में ही दबाए रखा गया। इसी लापरवाही को आधार बनाकर एनजीटी ने यह सख्त फैसला सुनाया है।


सख्त कार्रवाई की जाएगी
तहसीलदार सुनील वर्मा ने बताया कि कलेक्टर कार्यालय से वसूली संबंधी पत्र प्राप्त हुआ थाए जिसमें एनजीटी द्वारा लगाए गए आर्थिक दंड का स्पष्ट उल्लेख था। उसी के आधार पर नगरपालिका को मांगपत्र जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि नगरपालिका के जवाब का अवलोकन किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नाहीं पाए जााने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कचरा प्रबंधन बना कारण
एनजीटी की यह कार्रवाई शहर के तालाबों में हो रहे जल प्रदूषण और कचरा प्रबंधन केंद्र में समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण की गई है। एनजीटी की सेंट्रल जोनल बेंच भोपाल में प्रचलित प्रकरण क्रमांक 138/2024 में नगरपालिका बालाघाट पर यह पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई है।


पुराने आदेश पर ध्यान नहीं
शहर के लोगों का कहना है कि जब नियम 2016 में ही स्पष्ट थे तो नगरपालिका ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर हमेशा की तरह आर्थिक बोझ जनता पर ही डाला जाएगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वर्ष 2016 में कचरा प्रबंधन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर आदेश जारी किए थे, लेकिन नगरपालिका इन आदेशों का पालन नहीं कर सकी। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए एनजीटी ने 17.67 करोड़ रुपए का आर्थिक दंड लगाया है।
नपा कोर्ट जाने की तैयारी में
नगरपालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकार सीएमओ ने बताया कि मांगपत्र का जवाब तैयार किया जा रहा है। साथ ही एनजीटी के वसूली आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा। नगरपालिका अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2016 में जब ये आदेश जारी हुए थे उस समय कचरा प्रबंधन और सीवरेज ट्रीटमेंट के लिए शासन स्तर से कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई गई थी। वर्तमान में सरकार ने इन दोनों कार्यों के लिए राशि स्वीकृत कर दी है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृति का प्रस्ताव फिलहाल राज्य स्तरीय समिति के समक्ष विचाराधीन है।