राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। नगर को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर थी वही वर्षों से पर्यावरण को जहर देने में जुटे रहे। नगर पालिका परिषद बालाघाट के नजदीकी ग्राम रेंगाटोला में किए जा रहे बेतरतीब कचरा डंपिंग के गंभीर मामले में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर ने 17 करोड़ रुपये का जुमार्ना ठोक दिया है।

कई नियमों का उल्लघंन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में सामने आया कि बालाघाट नगरपालिका परिषद पिछले कई वर्षों से रेंगाटोला क्षेत्र में बिना किसी वैज्ञानिक और ठोस सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के कचरा डंप कर रही थी। यहां न तो कचरे का पृथक्करण किया गया न ही प्रोसेसिंग प्लांट की व्यवस्था की गई। इस वजह से सड़ता हुआ कचरा जमीन, हवा और पानी,तीनों को प्रदूषित करता रहा। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतों, मीडिया रिपोर्ट्स और निरीक्षण के बाद मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक पहुंचा। जहां यह स्पष्ट पाया गया कि नगर पालिका ने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स सहित पर्यावरण से जुड़े कई नियमों का खुला उल्लंघन किया है।

सीवेज ट्रीटमेंट भी गड़बड़
प्रकरण में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जबलपुर ने अब इस जुर्माने की वसूली के लिए आरआरसी रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। इसका मतलब साफ है कि यदि नगरपालिका परिषद बालाघाट समयसीमा में राशि जमा नहीं करती तो राजस्व वसूली की सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह राशि नगर पालिका पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति इंवीरोमेंटल कम्पेंशन के रूप में लगाई गई है,ताकि हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि मामला केवल कचरा डंपिंग तक सीमित नहीं है। नगर पालिका ने सीवेज ट्रीटमेंट की समुचित व्यवस्था नहीं होने से नालों का गंदा पानी बिना उपचार सीधे जलस्रोतों में छोड़ा जा रहा है। अवैध निमार्णों पर कार्रवाई न करना और पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना कार्य कराना भी इस भारी जुमार्ने के प्रमुख कारण रहे।

नपा ने मानकों का पालन नहीं किया
एनजीटी द्वारा ठोके गये जुर्माने से स्पष्ट होता है कि बालाघाट नगरपालिका परिषद ने निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया। जिससे प्रदूषण बढ़ा और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ा। यह मामला अब नजीर बन सकता है। मध्यप्रदेश के कई शहरों और नगरपालिकाओं में आज भी कचरा प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब है। एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब पर्यावरण से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जो नगर निकाय अभी भी कागजों में योजनाएं और जमीन पर कचरे के पहाड़ खड़े कि हुए हैं उन्हें समय रहते चेत जाना होगा।