राष्ट्रमत न्यूज,मुंबई(ब्यूरो)। लाडली बहिन योजना के दम पर महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार बनी।उस लाड़ली बहिन योजना में घोटाला होने पर सवाल उठ रहा है कि अपात्र लोगों को पैसा किसने दिया।मंत्री का कहना है कि अभी भी 26 लाख लोग अपात्र हैं।जाहिर सी बात है कि सरकारी पैसे का बंदरबांट हो रहा है। जबकि इस योजना को सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के लिए लाया गया था। इस योजना को विधानसभा चुनाव से पहले अगस्त, 2024 में शुरू किया गया था।

1500 रुपये की आर्थिक मदद
योजना के तहत सरकार ने वादा किया था कि पात्र महिलाओं के खाते में हर महीने डेढ़ हजार रुपये डाले जाएंगे लेकिन अब यह सामने आया है कि 14298 मर्दों ने इस योजना के तहत 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम अपने खातों में डलवा ली।इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है।
कुल रकम 164.52 करोड़ रुपये
आरटीआई के तहत प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि वेरिफिकेशन के बाद इन पुरुषों को लाभार्थियों की लिस्ट से हटा दिया गया है, साथ ही 77980 महिलाओं को भी अपात्र के रूप में पहचाना गया है। कुल मिलाकर आरटीआई के जवाब से पता चलता है कि इस योजना के तहत इन पुरुषों को 13 महीनों तक 1500 प्रति रुपये माह दिए गए, जबकि अपात्र महिलाओं को 12 महीनों तक यह राशि मिली गलत तरीके से दी गई। पुरुषों के लिए 24.24 करोड़ रुपये, महिलाओं के लिए लगभग 140.28 करोड़ रुपये थे और कुल मिलाकर यह रकम कम से कम 164.52 करोड़ रुपये थी।

हर महीने 3700 करोड़ रुपये का खर्च
अगस्त 2024 में सरकार ने योजना के प्रचार अभियान के लिए 199.81 करोड़ रुपये के खर्च की घोषणा की। इस समय लगभग 2.41 करोड़ महिलाओं को इस योजना का फायदा मिलता है। इससे सरकार को हर महीने लगभग 3700 करोड़ रुपये का खर्च आता है।एक अलग आरटीआई के जवाब में महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि इस योजना के तहत अनुचित लाभ लेने वालों में पुरुषों सहित कम से कम 2400 सरकारी कर्मचारी शामिल हैं और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है। हालांकि, आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि गलत तरीके से पैसे बांटने के किसी भी मामले में अभी तक कोई कार्रवाई या वसूली प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
26 लाख अपात्र हैं लोग
इस साल 25 अगस्त को राज्य की महिला बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने मराठी में एक्स पर पोस्ट किया था कि “मुख्यमंत्री माझी लड़की बहिन योजना के तहत लाभार्थियों में से, सूचना और प्रौद्योगिकी विभाग की प्रारंभिक जानकारी से पता चला है कि राज्य के सभी जिलों में लगभग 26 लाख लाभार्थी योजना की पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।”