राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। बीस साल तक वर्ग तीन की शिक्षिका अर्चना आर्या सेवा में नहीं थी। उसने खुद को बीमार बताया। शिक्षा विभाग ने लंबे समय से सेवा में नहीं होने की वजह से ज्वाइनिंग से इंकार कर दिया।शिक्षिका हाई कोर्ट जबलपुर में याचिका दायर की। लेकिन उसकी एक गलती को हाई कोर्ट ने पकड़ लिया और एसपी को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। चिकित्सक के फर्जी हस्ताक्षर को मामला उसके खिलाफ बनेगा साथ ही चिकित्सक के खिलाफ भी मामला दर्ज हो सकता है।

शिक्षिका के खिलाफ FIR
शिक्षिका अर्चना आर्या ने सुनवाई के दौरान अपनी बीमारी के दस्तावेज पेश किया। उसके फिटनेस में हाई कोर्ट ने देखा की फर्जी दस्तावेज हैं। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और रीवा एसपी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। आदेश के तहत रीवा पुलिस ने आज गुरुवार एफआईआर दर्ज कर ली।
हाई कोर्ट में याचिका दायर की
रीवा निवासी अर्चना आर्या ने याचिका में बताया कि उन्हें 2001 में शिक्षा कर्मी वर्ग तीन के पद पर नियुक्त किया गया था। बीमारी के कारण वे 2002 से 2018 तक सेवा से अनुपस्थित रहीं। 2018 में उन्होंने विभाग में दो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए। पहला 2006 का अनफिट बीमारी का प्रमाणपत्र और दूसरा 2017 का फिटनेस सर्टिफिकेट। अर्चना ने मांग की इन दस्तावेजो के आधार पर उनका मेडिकल अवकाश मंजूर कर उन्हें पुनः सेवा में लिया जाए। लेकिन विभाग ने उनकी मांग अस्वीकृत कर दिया। इसके बाद वो हाई कोर्ट चली गयी।

कोर्ट में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा
जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि 2006 का बीमारी प्रमाणपत्र और 2017 का फिटनेस प्रमाणपत्र दोनों रीवा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के एचओडी डाॅ प्रदीप कुमार के हस्ताक्षर हैं। कोर्ट को आश्चर्य हुआ कि एक व्यक्ति 11 साल तक कैसे एचओडी रह सकता है।कोर्ट ने रीवा मेडिकल कालेज के डीन डाॅ सुनील अग्रवाल से जवाब मांगा। उन्होंने बताया गया कि कालेज में मनोरोग विभाग का गठन वर्ष 2009 में हुआ, जबकि 2006 में यह विभाग अस्तित्व में ही नहीं था।
फर्जी हस्ताक्षर पर होगी कार्रवाई
डीन के जवाब से कोर्ट ने माना कि फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का यह मामला है। कोर्ट ने रीवा एसपी को निर्देश दिया कि फर्जी हस्ताक्षर करने वाले के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और 15 दिन में रिपोर्ट पेश की जाए।कोर्ट ने कहा कि शिक्षिका की 15 साल की गैरहाजिरी नौकरी से हटाने के लिए पर्याप्त कारण है। इस आधार पर अर्चना आर्या की याचिका खारिज की जाती है।
डाॅक्टर के खिलाफ जांच
एडिशनल एसपी आरती सिंह ने बताया कि कोर्ट ने पाया है कि दोनों प्रमाणपत्र एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं। फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं शिक्षिका की मदद करने वाले डाॅक्टर के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी यदि वो इस फर्जीवाड़े में शामिल होंगे।