राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट(ब्यूरो) । कलेक्टर मीना मृणाल ने कहा कि यह दुखद बात है कि सारी सुविधाएं अस्पताल में होने के बावजूद मातृ मुत्यु की घटना घटी। प्रयास ऐसे हो कि जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए भर्ती महिला को किसी भी स्थिति में प्रायवेट अस्पताल जाने की नौबत ना आये। प्रायवेट अस्पताल में भी उपचार के दौरान गर्भवती माता की मृत्यु होती है तो संबंधित अस्पताल को नोटिस जारी कर उनसे जवाब लें।

मातृ शिशु मृत्यु की समीक्षा
कलेक्टर मीना मृणाल ने जिले के सभी खंड चिकित्सा अधिकारी जिला चिकित्सालय के स्त्री रोग विशेषज्ञ डीपीएम एवं बीपीएम की बैठक लेकर प्रसव के दौरान जिले में हुई मातृ शिशु मृत्यु की समीक्षा की। इस बैठक में सिविल सर्जन डाॅ निलय जैन, प्रभारी सीएचएमओ डाॅ ऋत्विक पटेल, प्रसव के दौरान मृत गर्भवती माता को अस्पताल लाने वाली आशा कार्यकर्ता एवं मृतक महिला के परिजन भी उपस्थित थी।
माताओं की मौत पर चर्चा
बैठक में बताया गया कि 09 जुलाई 2025 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालबर्रा में ग्राम टेंगनीकला की प्रियंका पति राकेश, 16 जुलाई को लिंगा बालाघाट की यशवंती पति लक्ष्मण कावरे और बैहर तहसील के ग्राम नवलपुर की मंगलो पति गोलुराम धुर्वे, 10 अगस्त को कोकना निवासी दुर्गावती पति तारेश, 16 अगस्त को अर्जुननाला कटंगी की सरिता पति छमनलाल कुमरे एवं 04 सितम्बर 2025 को मयूरनगर बालाघाट की येमेश्वरी पति ललित बसेना की मृत्यु हुई। जहां इन प्रकरणों की एक-एक कर समीक्षा की गई और इन माताआंे की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई और उनके उपचार के लिए क्या प्रयास किये गए इसकी जानकारी ली गई। इस दौरान मृतक माताओं के परिजनों से भी अस्पताल में हुए अनुभव को सुना गया।

प्रायवेट अस्पताल में मृत्यु पर जवाब लें
कलेक्टर ने बैठक में कहा कि यह बहुत ही चिंताजनक है कि प्रसव के दौरान इन माताओ की मृत्यु हुई है। जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए सभी तरह की सुविधा होने के बाद भी मातृ मृत्यु को नहीं टाला जा सका। यह गंभीर स्थिति है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ने सभी चिकित्सकों से कहा कि प्रयास ऐसे हो कि जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए भर्ती महिला को किसी भी स्थिति में प्रायवेट अस्पताल जाने की नौबत ना आये। प्रायवेट अस्पताल में भी उपचार के दौरान गर्भवती माता की मृत्यु होती है तो संबंधित अस्पताल को नोटिस जारी कर उनसे जवाब लें।
निरंतर संवाद बनाएं
जिला चिकित्सालय से गर्भवती माता को प्रायवेट अस्पताल में जाने के लिए मजबूर न होना पड़े इसका विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं उनके स्टाफ को मरीज एवं उनके परिजनों से निरंतर संवाद कर उनकी काउंसलिंग करने एवं उन्हें वस्तु स्थिति से अवगत कराते रहने के निर्देश दिये।