प्रसूति विभाग की HOD की वजह से डाॅ शीतल ने भी दिया इस्तीफा - rashtrmat.com

प्रसूति विभाग की HOD की वजह से डाॅ शीतल ने भी दिया इस्तीफा

राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। रीवा के संजय गांधी अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में तीन महिला चिकित्सक के इस्तीफा देने के बाद एक और महिला चिकित्सक ने इस्तीफा दे दिया। जबकि इससे पहले भी डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ला से प्रसूति रोग विभाग की महिला चिकित्सकों ने घर जाकर विभागाध्यक्ष डाॅ बीनू कुशवाहा की शिकायत कर चुकी हैं। लेकिन कोई हल नहीं निकला। आज डाॅक्टर शीतल पटेल ने इस्तीफा दे दिया। जाहिर सी बात है कि रीवा को मेडिकल हब बनाने का दावा करने वाले डिप्टी सीएम को लगातार चोट मिल रही है।


बंद लिफाफे में इस्तीफा
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग विभागाध्यक्ष डाॅ बीनू कुशवाहा की वजह से मंगलवार को डाॅ शीतल पटेल ने इस्तीफा दे दिया। इसके पहले वरिष्ठ डाॅक्टर कल्पना यादव, डाॅक्टर पूजा गंगवार और डाॅक्टर सरिता सिंह इस्तीफा दे चुकी हैं। डाॅक्टर शीतल पटेल ने छुट्टी पर रहते हुए मेडिकल काॅलेज की अधिष्ठाता डाॅक्टर सुनील अग्रवाल को बंद लिफाफे में अपना इस्तीफा भेजा है। डाॅक्टर शीतल पटेल ने भी अपने पत्र में एचओडी डाॅ बीनू कुशवाहा के तानाशाही रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।


डिप्टी CM से शिकायत बेअसर
गौरतलब है कि विभाग की आठ महिला डाॅक्टर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से सामूहिक शिकायत कर चुकी हैं। लेकिन उपमुख्यमंत्री ने राजनीतिक तरीके से डीन को सामंजस्य बनाने का निर्देश देकर पल्ला झाड़ लिया।
 निजी वजह से इस्तीफा दिया
संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डाॅ राहुल मिश्रा का कहना है कि अधिकांश लोगों ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है। हालांकि अभी भी कुछ चिकित्सकों के साथ डीन की बैठकें हुई हैं। जिन्हें वापस लाने की कवायद जारी है।


डाॅक्टर बीनू पर आरोप
डाॅ बीनू कुशवाहा विभागाध्यक्ष पद ग्रहण करने के पश्चात् से वरिष्ठ चिकित्सकों एवं अन्य शिक्षकों से ऊँची आवाज में बात करना, अमर्यादित व्यवहार करना तथा सार्वजनिक रूप से मरीजों, सहकर्मी विकिलाकों पूर्व अन्य स्टाफ सफाई व सुरक्षा कर्मचारी सहित के सामने अपमानित करना उनकी कार्यशैली का सामान्य हिस्सा बन गया है। साथ ही विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप पर भी शिक्षकों से अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना नियमित हो गया। है। इससे चिकित्सकों का आत्मसम्मान आहत होता है और उनकी कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
स्टाफ से अनुचित व्यवहार
पूर्व में भी डाॅ बीनू कुशवाह के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही में दोषी पाई गई थीं तथा उन्हें विभागाध्यक्ष के पद से हटाया गया था। यह तथ्य उनके अनैतिक आचरण का स्पष्ट उदाहरण है। स्टाफ से अनुचित भाषा का प्रयोग, चीखना, चिल्लाना,  नौकरी से निकालने की धमकी देना, अनुचित नोटिस जारी करना पक्षपात एवं नियम विरुद्ध विवेकाचारिता करना, उनकी कार्यप्रणाली में निरंतर देखा गया है। उनके इस व्यवहार से विभाग में गंभीर असंतोष फैला है। परिणामस्वरूप एक वरिष्ठ चिकित्सक ने त्यागपत्र दे दिया एक अन्य ने त्यागपत्र का नोटिस दिया और एक अन्य चिकित्सक को सेवा से निष्कासन का नोटिस जारी किया गया है।


डाॅक्टर बीनू हिसाब नहीं देती
पिछले तीन वर्षों में डाॅ बीनू कुशवाहा द्वारा कोई भी शल्यक्रिया अपरेशन सफलतापूर्वक नहीं की गई। ये केवल दिखावे एवं अनावश्यक दबाव बनाने में संलाप्र रहती हैं। जो रोगी देखभाल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। साथ ही वे अन्य विकिलाकों और स्टाफ को स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करने देतीं। विभागीय फंड के नाम पर नियमित रूप से चिकित्सकों से धन एकत्रित किया जाता है, जिसका उपयोग एवं हिसाब किताब कभी प्रस्तुत नहीं किया जाता। जबकि महाविद्यालय से विभागीय व्यय हेतु नियमित राशि दी जाती है। यह कार्यवाही अवैध वसूली की श्रेणी में आती है।