पेंशन से ज्यादा पीड़ा,मदद को तरसता दिव्यांग परिवार - rashtrmat.com

पेंशन से ज्यादा पीड़ा,मदद को तरसता दिव्यांग परिवार

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक दिव्यांग दंपत्ति मदद की गुहार लेकर कलेक्टर के पास पहुंची। जो सिस्टम से सिर्फ मदद नहीं बल्कि जीने का अधिकार मांग रही थी। क्यों कि उनके लिए मात्र 600 रुपए पेंशन में परिवार इलाज, भोजन और बच्ची का भविष्य सबकुछ समेटना असंभव है। यह मामला उस व्यवस्था को आईना दिखाता है जहाँ दिव्यांगता के साथ गरीबी जुड़ जाए तो जीवन दया पर टिक जाता है।


विकलांग दंपत्ति के एक बच्ची है
किरनापुर क्षेत्र के करियादंड गांव का एक परिवार जिसमें दिव्यांग दंपत्ति और उनकी एक छोटी बच्ची है। परिवार बच्ची के साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और रोजगार की गुहार लगाई। पति भजनलाल शरणागत बचपन से दिव्यांग हैं और अब चल.फिर भी नहीं सकते। वहीं पत्नी भूमेश्वरी शरणागत हाथ से दिव्यांग है। जो डीएड व एमए तक शिक्षित हैं। वर्ष 2017 में सामूहिक विवाह के दौरान इस दिव्यांग दाम्पत्ति ने एक दूजे का हाथ थामा और विवाह के बंधन मे बंध गए।
अतिक्रमण में चाय ठेला चला गया
विवाह के बाद किसी तरह जीवन चल रहा था। दिव्यांग भजनलाल चाय का ठेला लगाता था।लेकिन एक बार अतिक्रमण की कार्रवाई उसका चाय का ठेला हटा दिया गया। आज स्थिति यह है कि दोनों 600 रुपए पेंशन के भरोसे जिंदगी गुजार रहे है। जिससे परिवार का गुजारा असंभव हो गया है। कई बार पेट भर भोजन भी नसीब नहीं होता तो कभी पड़ोसी मदद कर दें, तो चूल्हा जल जाता है। वरना भूखे रहना पड़ता है। परिवार व रिश्तेदारों के सहारे भी छूट चुके है। इस दिव्याग दंपत्ति मे पत्नी भूमेश्वरी शिक्षित है। जो अपने लिए योग्यता के अनुसार रोजगार की मांग कर रही है। परिवार में उनकी एक बेटी भी है,ताकि बच्ची का पालन.पोषण सम्मानपूर्वक कर सके। जनसुनवाई में मौजूद अधिकारियों ने उन्हें शीघ्र रोजगार उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। लेकिन फिलहाल उनका जीवन उम्मीद और इंतजार के सहारे ही चल रहा है। दिव्यांग दंपत्ति की पुकार अब प्रशासनिक दफ्तरों तक गूंज रही है।