राष्ट्रमत न्यूज बालाघाट (ब्यूरो)। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुईं 16 मौतों के विरोध में रविवार को कांग्रेस शहर अध्यक्ष श्याम पंजवानी के नेतृत्व में कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए सांसद भारती पारधी के कार्यालय पहुंचे। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे इस मामले में निवेदन करने आए थे, लेकिन सांसद बिना उनकी बात सुने ही वहां से चली गईं। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता नगर के विश्वेश्वरैया चैक स्थित सांसद कार्यालय तक थाली पीटते और घंटा बजाते हुए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के सामने धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। इस दौरान श्याम पंजवानी ने सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए उसे श्मदमस्त और घमंडीश् बताया। उन्होंने मांग की कि इंदौर की घटना के जिम्मेदार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।

प्रायोजित अपराध है इंदौर में मौत
कांग्रेसियो ने कहा कि इंदौर में दूषित पानी पीने से 16 निर्दोष नागरिकों की मौत किसी तकनीकी चूक या आकस्मिक दुर्घटना का परिणाम नहीं है। यह भाजपा शासित नगर निगम और राज्य सरकार की घोर लापरवाही, प्रशासनिक निकम्मेपन और संवेदनहीन सत्ता रवैये से उपजा राज्य प्रायोजित अपराध है। जिस शहर को वर्षों से स्मार्ट सिटी का तमगा देकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रचारित किया जा रहा है। उसी शहर में लोग नल से आने वाला पानी पीकर मर रहे हैं। यह विडंबना नहीं बल्कि शासन की विफलता का कड़वा सच है।

जांच क्या लाशों पर होगी
अब तक 16 परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। तब सरकार जांच की बातें कर रही है। सवाल यह है क्या अब जांच लाशों पर होगी।यदि समय पर जांच होतीए सप्लाई बंद की जाती तो क्या ये जानें बच नहीं सकती थीं। इस भयावह त्रासदी के बीच नगरी प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा पत्रकार के प्रश्न पर अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल करना सरकार की मानसिकता को उजागर करता है। यह कोई साधारण बयान नहीं, बल्कि मृतकों और उनके शोकाकुल परिवारों का अपमान है।
हत्या का मामला दर्ज किया जाए
कांग्रेसीयों ने कहा कि इस मामले में आधे.अधूरे आश्वासन स्वीकार नहीं होंगे। सरकार को तत्काल और ठोस कदम उठाने होंगे और दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों पर गैर.इरादतन हत्या नहीं, हत्या का मामला दर्ज किया जाए। प्रत्येक मृतक परिवार को कम से कम 01 करोड़ रुपये का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। पूरे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था का न्यायिक एवं स्वतंत्र आॅडिट कराया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। दूषित पानी की सप्लाई के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए।