कांकेर में धर्मातरण विवाद हिंसा में तब्दील,चर्च और सरपंच के घर तोड़फोड़ - rashtrmat.com

कांकेर में धर्मातरण विवाद हिंसा में तब्दील,चर्च और सरपंच के घर तोड़फोड़

राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर (ब्यूरो) । कांकेर जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में शव दफनाने को लेकर आदिवासी और धर्मांतरित समुदाय के बीच हिंसक झड़प हो गई। गुरुवार को आदिवासी समाज के लोग ईसाइयों को डंडे मारकर भगा रहे थे। इसके जवाब में धर्मांतरित समुदाय के लोगों ने आदिवासी समाज के लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। हालात पूरी तरह बिगड़ गए। आक्रोशित भीड़ ने लाठी-डंडों के साथ प्रदर्शन करते हुए गांव के चर्च में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। इतना ही नहीं, सरपंच के घर में भी तोड़फोड़ की गई। पुलिस जब स्थिति संभालने पहुंची तो ग्रामीणों से तीखी झड़प हो गई।

DIG तुकाराम कांबले  घायल

गुस्साए आदिवासियों ने सरपंच के घर में तोड़फोड़ कर दी। इसके बाद आदिवासी समाज के लोगों ने गांव के चर्च में आग लगा दी। ग्रामीण इसके बाद भी नहीं रुके। 3 हजार से ज्यादा की भीड़ आमाबेड़ा पहुंच गई। यहां भी एक चर्च को आग के हवाले कर दिया। भीड़ तीसरी चर्च को फूंकने आगे बढ़ रहे थे।इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया। घटना में कई ग्रामीण, कवरेज कर रहे कुछ पत्रकार और ASP अंतागढ़ आशीष बंशोड़ और DIG तुकाराम कांबले भी घायल हुए। इलाके में धारा 144 लागू की गई है।

शव निकालने की कोशिश हुई

  विवाद तब शुरू हुआ जब गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमरा राम की मृत्यु के बाद उनका शव गांव में ही दफना दिया गया। सरपंच के परिवार ने धर्म परिवर्तन किया था, जिससे ग्रामीण आक्रोशित थे।ग्रामीण शव को कब्र से बाहर निकालकर दूसरे स्थान पर अंतिम संस्कार की मांग पर अड़ गए। पुलिस की मौजूदगी में शव निकालने की कोशिश हुई, लेकिन इसे रोक दिया गया। इस दौरान दोनों पक्षों में झूमाझटकी हुई, जिसमें कुछ ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। हालात को देखते हुए गांव में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

शव को कब्र से निकालकर बाहर भेज दिया

भारी विरोध और हिंसा के बीच प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए शव को कब्र से निकालकर गांव से बाहर भेज दिया। इसके बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। हजारों ग्रामीण अब भी गांव में डटे हुए हैं और आदिवासी समाज दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है। एक ओर वे ग्रामीण हैं जो धर्मांतरण का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईसाई समुदाय का परिवार है, जो शव निकालने का विरोध कर रहा था। इस टकराव ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है।