राष्ट्रमत न्यूज,रायपुर (ब्यूरो)। इंदौर में दूषित पेयजल की आपूर्ति को लेकर मचे हाहाकार के बाद प्रदेश में भी पेयजल आपूर्ति को लेकर शासन अलर्ट हो गया है। सभी नगरीय निकायों को पेयजल की जांच करने निर्देश दिए गए हैं।रायपुर के 21, बिलासपुर के आठ, चरोदा के 14, रिसाली के 13, भिलाई के 23 और दुर्ग के पांच वार्डों में दूषित पानी की शिकायत मिली थी। नगरीय प्रशासन विभाग को करीब पांच माह पहले 14 नगर निगमों के 147 वार्डों में दूषित पानी की शिकायत मिली थीं। शासन ने कार्ययोजना तैयार कर शिकायतों को दूर करने के निर्देश दिए थे। इंदौर की घटना को देखते हुए शासन ने निकायों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी हैं।

रायपुर के 21 वार्डों में दूषित पानी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के सभी 192 नगरीय निकायों से उन क्षेत्रों का डेटा मांगा गया था, जहां गर्मी के दिनों में पाइपलाइन सूख जाती है या पानी दूषित आता है। रायपुर के 21, बिलासपुर के आठ, चरोदा के 14, रिसाली के 13, भिलाई के 23 और दुर्ग के पांच वार्डों में दूषित पानी की शिकायत मिली थी। इन क्षेत्रों में करीब 208.57 किमी लंबी पाइपलाइन के विस्तार और सुधार का लक्ष्य रखा गया था। शासन ने इसे दिसंबर 2025 तक पूर्ण करने का लक्ष्य तय किया था।
पाइपलाइन में लीकेज
निकायों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पिछले एक दशक में करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 500 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्टर अभी भी चल रहे हैं। लेकिन, रियल टाइम मानिटरिंग की व्यवस्था नहीं होने से यह पता नहीं चलता है कि पानी अंतिम छोर तक पहुंच रहा है कि नहीं। पाइपलाइन में लीकेज की जानकारी भी समय पर नहीं मिलती, जिससे नालियों का गंदा पानी पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। अधिकारियों का दावा है कि पेयजल की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाता। जल की आपूर्ति से पहले और बाद में तीन स्तरों पर जांच की जाती है। इसमें स्रोत स्तर, टंकी स्तर और वितरण स्तर पर पानी की नियमित जांच शामिल है।