राष्ट्रमत न्यूज,बीजापुर(ब्यूरो)। जिले में नशे की गोलियों और गांजा का बढ़ता प्रचलन अब एक गंभीर सामाजिक संकट का रूप लेता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता ने न केवल युवाओं को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि पूरे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बीते कुछ महीनों से नशे की गोलियों और गांजा का उपयोग और आपसी लेन-देन आम बात होती जा रही है। चौक-चौराहों, सुनसान मार्गों और कुछ रिहायशी इलाकों में नशे के प्रभाव में घूमते युवाओं की टोलियां अक्सर नजर आ जाती हैं। इससे इलाके का माहौल असुरक्षित होने के साथ-साथ पारिवारिक कलह, सड़क दुर्घटनाओं और असामाजिक गतिविधियों में भी इजाफा देखा जा रहा है।
नशे की गिरफ्त में बेरोजगार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नशे की गोलियों और गांजा का लगातार सेवन मानसिक संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इससे याददाश्त कमजोर होना, चिड़चिड़ापन, अवसाद, निर्णय क्षमता में कमी और पढ़ाई-लिखाई व रोजगार से दूरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई परिवारों ने बताया कि उनके बच्चों के व्यवहार में अचानक आए बदलाव ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है। चिंताजनक पहलू यह है कि अब नशे की गिरफ्त में केवल बेरोजगार या असामाजिक तत्व ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे युवा और स्कूली उम्र के बच्चे भी आने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि नशीले पदार्थों की सहज उपलब्धता के कारण बच्चों को सही राह पर बनाए रखना दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है।
समस्या पर नियंत्रण संभव नहीं
समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने इसे पूरे समाज के लिए चेतावनी मानते हुए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका कहना है कि नशे के दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान, परिवार की सतर्क निगरानी और सामाजिक जिम्मेदारी के बिना इस समस्या पर नियंत्रण संभव नहीं है।
बीजापुर में नशे की बढ़ती समस्या अब केवल कानून या व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक गहरी सामाजिक चिंता बन चुकी है। यदि समय रहते समाज स्तर पर ठोस और समन्वित पहल नहीं की गई, तो आने वाले समय में इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं।