आयुष शोध केन्द्र के निर्माण में लापरवाही का उठा तूफान - rashtrmat.com

आयुष शोध केन्द्र के निर्माण में लापरवाही का उठा तूफान

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)।जिले के परसवाड़ा क्षेत्र भादुकोटा में निमार्णाधीन आयुष शोध केंद्र इम्यूनिटी सेंटर का कार्य प्रगति पर है बताया जा रहा,लेकिन निर्माण स्थल पर दिखाई दे रही लापरवाहियाँ और अनियमितताएँ गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा लगभग 85.45 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे इस आयुष शोध केंद्र का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में आयुर्वेद योग और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। कार्य 15 जुलाई 2025 को प्रारंभ हुआ और 14 अप्रैल 2026 तक पूर्ण होना प्रस्तावित है। ठेकेदारी कार्य माँ दुर्गा एसोशिएट्म को सौंपा गया है। परंतु निर्माण की मौजूदा स्थिति कई शंकाओं को जन्म दे रही है।


ईंट और सीमेंट की गुणवता पर संदेह
विभागीय सूत्रों कि माने तो निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं दिखाई दे रही। ईंटों और सीमेंट की गुणवत्ता को लेकर संदेह जताया जा रहा है। कई जगहों पर अधूरी तराई, मिट्टी वाली भरण और बिना सुरक्षा मानकों के किया जा रहा कार्य साफ नजर आता है। यदि यही स्थिति रही तो यह केंद्र भविष्य में मरीजों के लिए सुविधा की जगह खतरा भी बन सकता है। नियमानुसार ऐसे निर्माण कार्यों में संबंधित विभाग के इंजीनियरों द्वारा नियमित निरीक्षण आवश्यक होता है,लेकिन स्थानीय स्तर पर तकनीकी निगरानी लगभग नदारद बताई जा रही है। कार्यकारी अभियंता और विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति बहुत कम देखने को मिलती है। जिससे ठेकेदार को मनमानी करने की खुली छूट मिल रही है।


निर्माण कार्य की जांच कराएं
स्थानीय नागरिकों कि माने तो यह परियोजना जनता के स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ कागजों में प्रगति दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है।मौजूदा गति और अव्यवस्था को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि कार्य समय सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूरा हो पाएगा या नहीं। अगर इसी तरह काम चलता रहा तो जल्दबाजी में अधूरा और कमजोर निर्माण खड़ा कर दिया जाएगा। स्थानीय जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि आयुष शोध केंद्र के निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ताए भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की भी गहन समीक्षा होनी चाहिए। दोषी पाए जाने पर ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।