राष्ट्रमत न्यूज,रीवा/ मऊगंज(ब्यूरो)। डेयरी प्लस योजना ने पति और पत्नी को अलग कर दिया। उनके बीच तलाक नहीं हुआ लेकिन डेयरी प्लस योजना झगड़े की कारण बना। मध्य प्रदेश की डेयरी प्लस योजना के तहत दो भैंस मिलने की उम्मीद में अंगिरा पांडे ने अपनी पत्नी के गहने तक गिरवी रख दिए। एक लाख 47 हजार रुपये जमा किए। लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें भैंस नहीं मिलीं।अब हालात ऐसे हैं कि पति-पत्नी अलग.अलग रहने को मजबूर हैं। आखिर सरकारी योजना की देरी का खामियाजा इस परिवार को क्यों भुगतना पड़ रहा है।

उम्मीद और सपने पर पानी फिर गया
गौरतलब है कि सरकार कहती है किसानों की जिन्दगी में खुशहाली लाने वाली योजना है डेयरी प्लस योजना। लेकिन अंिगरा पंाडे के जीवन उल्टा हो गया।स्थिति यह हो गयी है कि पत्नी और पति अलग रहते हैं।महौता निवासी अंगिरा को उम्मीद थी कि जल्द ही डेयरी प्लस योजना के तहत उन्हें भैस मिल जाएगी। और वो पत्नी का गिरवी रखा गहना छुड़ा लेंगे। घर की आर्थिक स्थिति भी सुधर जाएगी। लेकिन दस महीने के बाद भी उन्हें डेयरी प्लस योजना का लाभ नहीं मिला।

अंगिरा पांडे झोपड़ी में रह रहे
अंगिरा पांडे की श्रीमती ने कहा जब तक गहना नहीं लाओगे घर आना नहीं।आज दस महीने हो गए। भैंस मिली नहीं। गिरवी रखे गहने भी नहीं छुड़ा पाए। अंगिरा पांडे अब तक भैंस मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी बात को लेकर घर में विवाद बढ़ने लगा। अंगिरा पांडे अपनी पत्नी से अलग होकर खेत में बनी एक झोपड़ी में रहने लगे।
भैंस उपलब्ध कराने में देरी हुई
इस मामलें में पशुपालन विभाग मउगंज के डिप्टी डायरेक्टर जे एल साकेत कहते हैं यह सही है कि डेयरी प्लस योजना के तहत पशु उपलब्ध कराने में देरी हुई है। उनका कहना है कि भैंसें हरियाणा से लाई जाती हैं। ठेकेदार एक बार में कम से कम पांच हितग्राहियों यानी दस पशुओं की व्यवस्था होने पर ही पशु लेकर आता है। इसी वजह से हितग्राहियों को इंतजार करना पड़ रहा है।

पन्द्रह दिनों में भैंस मिल जाएगी
हालांकि सवाल यह है कि अगर पशु बाहर से लाने और हितग्राहियों की संख्या पूरी होने में समय लगता है तो फिर लाभार्थियों को समय रहते इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। और क्या योजना का लाभ लेने के लिए रकम जमा कर चुके परिवारों को इस तरह महीनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अधिकारी का कहना है कि अगले 15 दिनों के भीतर अंगिरा पांडे को दोनों भैंसें उपलब्ध करा दी जाएंगी।