राष्ट्रमत न्यूज,रीवा(ब्यूरो)। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के रीवा का सबसे विकसित और व्यवस्थित वार्ड नम्बर 13 यानी नेहरू नगर है। हैरानी वाली बात है कि पहली बारिश में ही ऐसा नजारा था कि मानो सबकेे घर के सामने से नदी बह रही है। यह स्थिति अकेले नेहरू नगर की ही नहीं थी। विभिषण नगर, सुन्दरनगर, निपनिया, घोघर, तरहटी, उपरहटी,ढेकहा बेदाबाग सहित दर्जनों मोहल्ले की है। नेहरू नगर यानी वार्ड 13 में पुराने राष्ट्रीय राज मार्ग पर मौजूद रिलायंस पेट्रोल पंप से लेकर मिश्रा पेट्रोल पंप के बीच करीब एक फर्लांग के फासले में 5 पुलियां है। जाहिर सी बात है कि बारिश से पहले नालों की सफाई हुई नहीं,इसलिए पानी निकला नहीं और गलियांें में नदी बहने का नाजारा देखने को मिला। वैसे भी पानी निकासी की व्यवस्था है ही नहीं।

चलो फिर खोदें विकास के लिए
डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला पिछले 17 वर्षो से रीवा को महानगर बता रहे हैं। काप्लेक्स होना ही महागनर है उनके लिए। हर मोहल्ले को बाइपास बना दिया,लेकिन पानी निकासी कहीं नहीं। रीवा को खोदो और फिर खोदो,यही उनका विकास है। पिछले साल बीजेपी विधायक नागेन्द्र सिंह के घर में पानी भर गया था। इस बार आधे से ज्यादा वार्ड की सड़कें पहली बारिश में मर गयी। बोदाबाग मार्ग ऐसा लगता है कि यहां कभी सड़क थी नहीं।
मुश्किलें बढ़ जाती नेहरू नगर में
समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा कि मुश्किल से आधा घंटे तेज बारिश हो जाने पर पुराने राष्ट्रीय राज मार्ग पर मौजूद रिलायंस पेट्रोल पंप से लेकर मिश्रा पेट्रोल पंप के बीच करीब एक फर्लांग के फासले में 5 पुलियां है। मगर पानी नहीं निकल सका। जिससे पानी लोगों के घरो में घुसने लगा। अीाी तो पूरी बरसता बची है मंगलवार की सुबह कुछ देर की बारिश होने पर सड़क और घरों में कृत्रिम बाढ़ का परिदृश्य नजर आया। यदि कुछ देर में बरसात नहीं रुकती तो मुश्किलें काफी बढ़ जातीं।

विकास की कलई खुली
नेहरूनगर में घरेलू पानी का निस्तार बंद हो जाने के बाद भी नालों में पानी बना रहता है। यदि नाले नाली सही बने होते तो घरेलू निस्तार बंद होने के बाद उन्हें खाली नजर आना चाहिए। योजनाकारों को यह देखना चाहिए कि आखिरकार गड़बड़ी कहां है। किस वजह से पानी को बहाव नहीं मिल पा रहा और कृत्रिम बाढ़ की स्थिति निर्मित हो जाती है। कुछ देर की बारिश में ही कथित विकास की कलई खुल जाती है। नदी में बाढ़ नहीं फिर भी शहर के अंदर और ऊपरी भाग में भी जल भराव का परिदृश्य देखने को मिलता है।
सिर्फ विकास का ढिंढोरा पीटते हैं
परंपरागत बहाव के रास्ते केवल नेहरू नगर में ही बंद नहीं होता बल्कि घोघर,निपनिया, बोदाबाग, सुन्दरनगर,तरहटी,ढेकहा सहित दर्जनों मोहल्ले हैं,जहां पानी निकासी है ही नहीं। नेहरू नगर जैसी विकसित कालोनी में कुछ देर की बारिश में जल भराव की समस्या बन जाती है। लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं हो पाना शासन की गैर जिम्मेदाराना कार्य पद्धति है। हर बरसात में जेसीबी भेजकर ऐसा माहौल बनाया जाता जैसे वह पानी का रास्ता बना रही हो। जब बरसात बंद होती है तो धीरे धीरे पानी निकल जाता है।