आदिवासियों ने कहा,बाॅक्साइट खनन में कानून की अनदेखी,किया चक्का जाम - rashtrmat.com

आदिवासियों ने कहा,बाॅक्साइट खनन में कानून की अनदेखी,किया चक्का जाम

राष्ट्रमत न्यूज,बालाघाट(ब्यूरो)। दक्षिण बैहर क्षेत्र के पचामा दादर सहित विभिन्न आदिवासी ग्रामों में प्रस्तावित बाक्साइट खनन के विरोध में धरना देकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि बालाघाट जिले में बक्साइट खनन की अनुमति में कानूनों की अनदेखी किया कजा रहा है। आरोप लगाते हुए आदिवासी समाज ने गुरुवार को उकवा में चक्काजाम आंदोलन किया।इस आंदोलन में स्थानीय विधायक संजय उईके भी रहे। आदिवासियों का कहना है कि सरकार जंगल क्षेत्रों में खनिज दोहन के लिए नियमों का पालन नहीं कर रही है।बिना विधिवत प्रक्रिया पीएल के माइनिंग लीज स्वीकृत किए जाने की कोशिश की जा रही है,जो ग्रामसभा के अधिकारों का उल्लंघन है।

लोगों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है।

 

आंदोलन जारी रहेगा

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का ये भी कहना है कि वे अपने जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए एकजुट हैं और किसी भी कीमत पर पर्यावरण व परंपरागत अधिकारों से समझौता नहीं करेंगे। आदिवासियों का सरकार और प्रशासन पर आरोप है कि ग्राम सभाओं की सहमति लिये बिना ही दादर बॉक्साइट ब्लॉक उत्खनन की स्वीकृति प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है, जो संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। जबकि पेसा एक्ट 1996 तथा नियम 2022 के नियम 27 के तहत ग्राम सभाओं को वन संसाधन (उऋफफ) अधिकार दिये जाने का प्रावधान है।

खनन स्वीकृति विधि संगत नहीं

प्रस्तावित खनन क्षेत्र के ग्राम लूद, हिरी, कोंगेवानी, बम्हनी, हर्शनाला, घोंदी, लौगुर, पोला, कंदई सहित 77 ग्रामों को संभावित ग्राम मानते हुए वन अधिकार दिये जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में वनाधिकार मान्यता कानून 2006 की धारा 4(5) के अनुसार अधिकार सुनिश्चित किये बिना खनन स्वीकृति एवं जनसुनवाई की तिथि तय करना विधि संगत नहीं है।

उकवा क्षेत्र में विरोध तेज  

उल्लेखनीय है कि मेसर्स कटनी मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को कोटपहर बॉक्साइट ब्लॉक (ग्राम पचामा, कोटपहर ब्लॉक, तहसील बैहर, जिला बालाघाट) में खनन हेतु पर्यावरण स्वीकृति प्रक्रिया के अंतर्गत लोक सुनवाई के दस्तावेज प्रस्तुत किये गये हैं। प्रस्तावित लीज क्षेत्रफल 35.90 हेक्टेयर है तथा खनन क्षमता 30,139.20 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है। खनन स्वीकृति से पूर्व स्थानीय सहमति, वनाधिकार मान्यता और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर उठे सवालों के बीच उकवा क्षेत्र में विरोध तेज हो गया है।

सड़क से कोर्ट तक विरोध की चेतावनी

विधायक संजय उईके ने आरोप लगाया कि सरकार ने बक्साइट खनन के लिए 117, 35, 60 और 156 हेक्टेयर के जो ब्लॉक बनाए हैं, उनकी इजाजत देने में ग्रामसभा, पेसा एक्ट, वन अधिकार कानून और फॉरेस्ट रिजर्व एक्ट की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह विरोध सड़क से लेकर सदन और कोर्ट तक जाएगा।

वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करें

दरअसल, जिले के लौंगुर और पचामा दादर के बीच स्थित 60 हेक्टेयर बक्साइट खनन ब्लॉक की अनुमति के लिए आगामी 18 फरवरी को जनसुनवाई रखी गई है। आदिवासी समाज चाहता है कि इस जनसुनवाई से पहले बक्साइट ब्लॉक में सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।

ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है

विधायक संजय उईके ने बताया कि लौंगुर-पचामा दादर के जंगल में आवंटित खनन ब्लॉक वन और आदिवासी क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां पेसा एक्ट लागू है। ऐसे में किसी भी वनभूमि का उपयोग करने के लिए ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि इस वनक्षेत्र में आदिवासियों की आस्था और देवी-देवताओं का वास है।

बक्साइट खनन के लिए इजाजत न लेने का आरोप लगाया गया है।

अनुमति अब तक नहीं मिली है

यह क्षेत्र कान्हा और पेंच कॉरिडोर का भी हिस्सा है, जहां से वन्यजीवों का आवागमन होता है। विधायक उईके ने कहा कि इस क्षेत्र में वन अधिकार और फॉरेस्ट रिजर्व एक्ट लागू हैं, जिसके तहत सामूहिक वन संसाधन के अधिकार मिलने चाहिए, लेकिन इसका कहीं भी पालन नहीं किया गया है।उन्होंने सवाल उठाया कि जहां जंगल से लकड़ी काटने पर कार्रवाई होती है, वहीं वनाधिकार कानून के तहत लगाए गए वन संसाधन के अधिकारों की अनुमति अब तक नहीं मिली है, जबकि यह क्षेत्र उच्च घनत्व वाला है।